
नईदुनिया, राज्य ब्यूरो, भोपाल। भारत सरकार की जनवरी 2026 में जारी जल जीवन मिशन की फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के 36.70 प्रतिशत सैंपल अपात्र पाए गए हैं। इसी रिपोर्ट में प्रदेश में 96.30 प्रतिशत उपभोक्ताओं द्वारा प्रदाय जल की गुणवत्ता पर संतुष्टि जताई गई है। रिपोर्ट के दोनों तथ्य एक-दूसरे का समर्थन नहीं करते हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार से जांचे गए पेयजल सैंपलों की रिपोर्ट मांगी है।
यह बात विधानसभा में सोमवार को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि क्वालिटी चेक की कमी के कारण लोगों के बीमार होने की कोई रिपोर्ट नहीं है। विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा मांगी गई पेयजल सैंपल परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद परीक्षण की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त कर आगामी कार्रवाई के साथ विचार किया जाएगा।
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दरअसल, सिंघार ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि सितंबर-अक्टूबर 2024 में प्रदेश के 15 हजार से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के घरों से पानी के नमूने लिए गए थे, जिनमें से बड़ी संख्या में बैक्टीरिया व रासायनिक गड़बड़ियां पाई गई थीं। क्वालिटी चेक में कमी के कारण हर साल हजारों लोग बीमार हो रहे हैं।