नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति साबित हो रही है। यही कारण है कि पिछले छह महीने में शहरी सीमा पर स्थित पंचायतों में करीब 50 अवैध कॉलोनियां बिना किसी अनुमति के विकसित हो गई हैं।
इनमें कॉलोनाइजर तमाम सुविधाओं के दावे कर लोगों को प्लाट बेचने में जुटे हुए हैं। जबकि जिला प्रशासन पहले भी करीब 111 अवैध कॉलोनियां चिह्नित करवा चुका है, जिनका प्रकरण कलेक्टर न्यायालय तक में चला था।
एफआईआर के निर्देश भी बेअसर
यहां से संबंधित एसडीएम को निर्देश दिए गए थे कि अवैध कॉलोनाइजरों व भूमि स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए। इसके बाद भी एसडीएम, तहसीलदारों ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है।यही कारण है कि कॉलोनाइजरों के हौसले बुलंद हैं और वह भूमि स्वामियों के साथ मिलकर अवैध कॉलोनी विकसित कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार नगर निगम सीमा से लगे ग्रामीण इलाकों में कॉलोनाइजरों द्वारा तेजी से अवैध कॉलोनियां विकसित की गई हैं। इन कॉलोनियों में वह बिजली, पानी, सीवेज, पार्क, मंदिर, सड़क आदि सुविधाओं का कागजों में दावा कर लोगों को प्लाट बेचते हैं। जब लोग अपनी जिंदगीभर की जमा पूंजी लगाकर प्लाट खरीदते हैं तो उन्हें सिर्फ रजिस्ट्री ही हाथ लगती है बाकि सुविधाएं सिर्फ कागजों में रह जाती हैं।
बाद में लोग बिजली कनेक्शन से लेकर अन्य सुविधाओं के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। ऐसे में इन अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने व लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कलेक्टर कार्यालय द्वारा निर्देश दिए गए , लेकिन उन पर प्रमुखता से अमल नहीं किया गया है। इसी वजह से अब भी लोग परेशान हैं और कॉलोनाइजर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं।
आसान किस्तों का देते हैं झांसा
कॉलोनाइजर अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने लिए लोगों को आसान किस्तों का झांसा देते हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं होता है, यह सिर्फ एक मौखिक झांसा होता है। एक ग्राहक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लांबाखेड़ा भोपाल बायपास पर एक कॉलोनी में उसने प्लाट खरीदने का सौदा किया था, तब उसे बताया गया कि उससे हर महीने किस्त ली जाएगी ।जब अंतिम बातचीत हुई तो एकमुश्त राशि जमा करने को कहा गया तो सौदा निरस्त करना पड़ा।
स्थायी बिजली कनेक्शन बड़ी चुनौती
ओंकारा सेवनियां की एक अवैध कालोनी में प्लाट लेने वाले रहवासियों ने कलेक्ट्रेट में शिकायत की थी कि प्लाट देते समय उन्हें बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवाने का दावा किया गया था। लेकिन बाद में उन्हें बिजली कनेक्शन लेना बड़ी चुनौती बन गया है और अस्थायी कनेक्शन के लिए 8 से 10 हजार रुपये तक चुकाना पड़ता है। यह हालात सभी अवैध कॉलोनियों में बने हुए हैं।
सड़क व बाउंड्री तोड़ने तक सीमित कार्रवाई
हुजूर, कोलार व बैरसिया तहसीलों में बड़े स्तर पर अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।इनमें कभी-कभी कार्रवाई होती है, लेकिन वह सिर्फ सड़क व बाउंड्री वाल तोड़ने तक सीमित रह जाती है।इसी वजह से तेजी से अवैध कॉलोनियों का जाल बढ़ता जा रहा है।
इनमें लांबाखेड़ा, ईंटखेड़ी, अरवलिया, परवलिया, अचारपुरा, परेवाखेड़ा, मुबारकपुर, डोबरा, गांधी नगर, परवलिया सड़क, जगदीशपुर, देवलखेड़ी, श्यामपुर, इमलिया, मुगालिया कोट, गोलखेड़ी, दुपाड़िया, रायपुर, ओंकारा सेवनियां, सूखीसेवनियां, रातीबड़, नीलबड़, ईंटखेड़ी छाप सहित अन्य ऐसे इलाके हैं, जहां अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।
दो साल पहले 34 अवैध कालोनियां पर हुईं थी एफआईआर
जिले में करीब दो साल पहले तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर अवैध कॉलोनियों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की थी। इनमें करीब 61 अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस थमाए गए थे, जबकि 34 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। इनमें कुराना, छावनी पठार, सिंकदराबाद, पिपलिया बेरखेड़ी और थुआखेड़ा , सुरैया नगर, कालापानी, कोटरा, सेवनिया ओंकारा, कान्हासैया, अरेड़ी, कोलुआखुर्द, शोभापुर की अवैध कॉलोनियां शामिल थीं।
अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा नियमित कार्रवाई की जाती है, पूर्व में नोटिस भी जारी किए गए थे। हुजूर, कोलार व बैरसिया एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले कॉलोनाइजर व भूमि स्वामियों को चिह्नित कर कार्रवाई करें।- प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर