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AIIMS भोपाल में 90 पद खाली: सर्जरी के लिए मिल रही लंबी वेटिंग, सुपर स्पेशलिटी विभाग सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे

एम्स भोपाल में 221 स्वीकृत फैकल्टी पदों में करीब 90 रिक्त हैं, जिससे सुपर स्पेशलिटी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। रिक्त पदों को भरने के लिए 24 विभागों मे...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 08:10:58 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 08:10:58 PM (IST)
AIIMS भोपाल में 90 पद खाली: सर्जरी के लिए मिल रही लंबी वेटिंग, सुपर स्पेशलिटी विभाग सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे
एम्स भोपाल। फाइल फोटो।

HighLights

  1. एम्स भोपाल में 221 स्वीकृत पदों में करीब 90 खाली
  2. कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी और न्यूरोसर्जरी में सीमित विशेषज्ञ
  3. अब 45 असिस्टेंट प्रोफेसर की निकाली संविदा भर्ती

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । एम्स भोपाल में करीब 40 प्रतिशत फैकल्टी पद खाली होने से सुपर स्पेशलिटी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि कॉर्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और सीटीवीएस जैसे विभागों में विशेषज्ञों की संख्या सीमित है।

वहीं, इन विभागों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों को सर्जरी के लिए लंबी तारीख मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।


संविदा से भरेंगे पद

एम्स भोपाल में कुल 221 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं, लेकिन करीब 90 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए संस्थान ने अब 24 विभागों में 45 असिस्टेंट प्रोफेसर की संविदा नियुक्ति के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की है। ये नियुक्तियां एक साल की अवधि के लिए की जाएंगी।

24 विभागों में डॉक्टरों की जरूरत

एम्स में निकाली गई निविदा में कार्डियोलाजी में एक, नेफ्रोलाजी में तीन, न्यूरोसर्जरी में एक, क्रिटिकल केयर मेडिसिन में दो और ट्रामा एंड इमरजेंसी मेडिसिन में दो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हैं।

इसके अलावा मेडिकल आन्कोलॉजी-हेमेटोलॉजी में चार, रेडियो डायग्नोसिस में चार, पल्मोनरी मेडिसिन में तीन, रूमेटोलॉजी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में तीन तथा सर्जिकल आन्कोलॉजी में तीन पद शामिल हैं।

बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी, नियोनेटोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलाजी, यूरोलॉजी, मेडिकल जेनेटिक्स समेत अन्य विभागों में भी पद निकाले गए हैं। कुल 45 पदों पर संविदा नियुक्ति की जानी है।

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मरीजों की संख्या बढ़ी, विशेषज्ञ सीमित

एम्स भोपाल में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एक दिन की ओपीडी लगभग छह हजार रहती है। सुपर स्पेशलिटी विभागों में जटिल बीमारियों के मरीजों के साथ ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीज भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का असर ओपीडी, जांच, फॉलोअप और सर्जरी की प्रतीक्षा अवधि पर पड़ सकता है। मरीजों के अनुसार कुछ ऑपरेशन के लिए कई महीने बाद की तारीख मिलने से उन्हें निजी अस्पतालों का विकल्प तलाशना पड़ता है।