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MP के 48.32 लाख लोगों को मिली बड़ी सौगात, निजी संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री कराएगी सरकार

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे के बाद अब आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक मि...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 09:34:26 PM (IST)Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 09:34:26 PM (IST)
MP के 48.32 लाख लोगों को मिली बड़ी सौगात, निजी संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री कराएगी सरकार
स्वामित्व योजना के तहत 48.32 लाख ग्रामीणों की फ्री होगी रजिस्ट्री।

HighLights

  1. स्वामित्व योजना के तहत 48.32 लाख ग्रामीणों की फ्री होगी रजिस्ट्री
  2. पहली से आठवीं तक के छात्रों को अब पैसे के बजाय मिलेगी गणवेश
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से अभियान के शुभारंभ कराने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे के बाद अब आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा। इस योजना में जिन भूखंडधारियों को अधिकार पत्र मिला है, सरकार उनके भूखंड की रजिस्ट्री निशुल्क कराएगी। इसके लिए वाणिज्यिक कर विभाग को लगभग 3,800 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी की भरपाई राज्य सरकार करेगी।

इसका लाभ 48.32 लाख ग्रामीणों को मिलेगा। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य होगा। रजिस्ट्री कराने का लाभ यह होगा कि संपत्ति धारक को बैंकों से ऋण मिल सकेगा। यह बड़ा निर्णय मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इस काम को अभियान चलाकर एक साल में पूरा किया जाएगा। इसकी शुरुआत भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराने की है।


'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' को मंजूरी

स्वामित्व योजना में मध्य प्रदेश ने अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया, जिसमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन्हें अधिकार पत्र तो दे दिए गए लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बैंकों ने इसके आधार पर ऋण नहीं दिया। उन्हें रजिस्ट्री चाहिए। इसके लिए कैबिनेट की बैठक में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 को स्वीकृति दी गई। इसमें डीड आफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा। इससे संपत्तिधारक नागरिक गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि कार्य आदि के लिए ऋण ले पाएंगे।

स्टांप ड्यूटी की भरपाई के लिए अधिनियमों में संशोधन

अधिनियम में छूट देने का प्रविधान नहीं मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 और मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में स्टांप ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से छूट देने का प्रविधान नहीं है। योजना को लागू करने के लिए दोनों अधिनियम में संशोधन करना होगा। इसके लिए अध्यादेश के प्रारूप का अनुमोदन भी बैठक में किया गया। इससे संबंधित कार्रवाई करने के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।

बैठक में प्रमुख सचिव, वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा कि स्टांप शुल्क में छूट देने से बड़ा नुकसान हो जाएगा। करीब 3,800 करोड़ नहीं मिलेंगे। इस पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि यह राशि वित्त विभाग अपनी ओर से वाणिज्यिक कर विभाग को देगा। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्र में रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत पंचायत उपकर और आधा प्रतिशत सेस लगता है।

योजना की समीक्षा के लिए समिति का गठन

आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में बनेगी समिति योजना की समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त या संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास के साथ प्रबंध संचालक एमपीएसइडीसी सदस्य होंगे। योजना को लेकर जन-जागरूकता की गतिविधियों के संचालन के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृत भी दी गई।

अब नगद राशि के स्थान पर सीधे मिलेगी गणवेश

पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को अब गणवेश देगी सरकार सरकारी स्कूलों के पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को गणवेश (यूनिफार्म) के लिए अब नकद राशि नहीं दी जाएगी। इसके स्थान पर गणवेश तैयार कराकर दिए जाएंगे। प्रस्ताव तीन वर्ष तक के लिए व्यवस्था बनाने का था लेकिन इस प्रयोग को पहले एक वर्ष के लिए करने की स्वीकृति दी गई। गणवेश की आपूर्ति के लिए टेंडर किए जाएंगे। इस प्रक्रिया को पाठ्यपुस्तक निगम करेगा। उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को दो जोड़ी गणवेश दिए जाते हैं।

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वर्ष 2017 के पहले तक powerloom और बुनकर महासंघ के माध्यम से गणवेष दिए जाते थे। इसके बाद पालक शिक्षक संघ को शामिल किया गया। जनधन और सीधे नकदी अंतरित करने की व्यवस्था बनने के कारण 600 रुपये के मान से सीधे राशि दी जाने लगी लेकिन इसका सदुपयोग नहीं हुआ। मुख्यमंत्री जब कई सांदीपनि स्कूल गए तो वहां विद्यार्थियों को गणवेश में न आने पर कारण पूछा तो बताया गया कि राशि तो मिल गई लेकिन उसका उपयोग नहीं किया। तभी व्यवस्था परिवर्तन का मन बना लिया गया था।