
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ की व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करने के लिए सरकार स्थानीय अधिकारियों को अधिक अधिकार संपन्न बनाएगी। इसके लिए सिंहस्थ मेला अधिनियम-1955 में संशोधन की तैयारी है। संशोधन के लिए उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मेला अधिनियम के प्रविधान का अध्ययन कराने के साथ अधिकारियों के अलग-अलग दल भेजकर कुंभ की व्यवस्थाओं को दिखवाया गया।
इसके आधार पर तय किया गया है कि उज्जैन मेला प्राधिकरण बनाया जाएगा, जो केवल मेला क्षेत्र से जुड़े कामों को देखेगा। मध्य प्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम तथा नगर निवेश संचालनालय द्वारा सिंहस्थ मेला अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि प्रयागराज में होने वाले मेलों का प्रबंधन मेला प्राधिकरण करता है। इसमें आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर, मेला अधिकारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं। ठीक इसी तरह से सिंहस्थ मेला प्राधिकरण बनाया जाएगा। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री रहेंगे।
प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, जल संसाधन, बिजली, परिवहन समेत तमाम विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति, श्रद्धालुओं व साधु-संतों से परामर्श करके व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर को अधिक अधिकार संपन्न बनाया जाएगा।
मेला आयोजन की सभी व्यवस्थाओं पर सीधा नियंत्रण होगा। विभागीय तालमेल बैठाने का दायित्व भी कलेक्टर का रहेगा और अंतिम निर्णय भी वही लेंगे। किसी कार्रवाई के लिए प्रस्ताव शासन को भेजने की आवश्यकता नहीं होगी, वे सीधी कार्रवाई कर सकेंगे।

सिंहस्थ की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने नगरीय विकास और पुलिस के अधिकारियों को प्रयागराज कुंभ भेजा था। टीम ने वहां भीड़ प्रबंधन, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का उपयोग, शाही स्थान, स्वास्थ्य, भोजन सहित अन्य व्यवस्थाओं को देखा। इसके आधार सभी संबंधित विभाग अपनी-अपनी कार्य योजना तैयार कर रहे हैं।
भीड़, यातायात, आपदा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था आदि के लिए 60 हजार से अधिक पुलिस बल तैनात किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था की कमान आइजी, एसपी स्तर के अधिकारियों के हाथ में रहेगी।