
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मौत के बाद भी शरीर में मौजूद बैक्टीरिया और फंगस की जांच से संक्रमण और मृत्यु के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। इसी दिशा में एम्स भोपाल के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की पीएचडी शोधार्थी अश्विनी चंद्रन ने 331 शव परीक्षण में बैक्टीरिया और फंगस का अध्ययन किया है।
यह शोध मृत्यु के बाद शरीर में मौजूद सूक्ष्मजीवों की जांच पर केंद्रित है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन संक्रमणों का पता समय पर नहीं चल पाया, अस्पतालों में संक्रमण किस तरह फैल रहे हैं और बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर क्यों कम हो रहा है। कुछ मामलों में मृत्यु का कारण स्पष्ट करने में भी इस तरह की जांच उपयोगी हो सकती है। शोध में फंगस से होने वाले संक्रमणों को समझने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
अश्विनी चंद्रन का एक अन्य शोधपत्र इंटरनेशनल जर्नल ऑफ लीगल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इसमें मृत्यु के बाद रक्त में प्रोकैल्सिटोनिन नामक पदार्थ की जांच से सेप्सिस यानी शरीर में गंभीर संक्रमण के कारण हुई मौत की पहचान करने की उपयोगिता का अध्ययन किया गया है।
अश्विनी चंद्रन को यूरोपियन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ईएससीएमआईडी) के दो अध्ययन समूहों की ओर से आयोजित वेबिनार में वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। इसमें चार वक्ताओं ने अपने शोध साझा किए। अश्विनी के पीएचडी शोध के पर्यवेक्षक डॉ. अर्नीत अरोड़ा हैं। डॉ. जयंती यादव, डॉ. निरंजन साहू, डॉ. आयुष गुप्ता, डॉ. सागर खडंगा और डॉ. टी. करुणा सह-मार्गदर्शक हैं।