कांग्रेस राज्यसभा सीट के साथ जनता में नरैटिव की लड़ाई भी हार गई
मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद हो जाने के बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की याचिका सुनेगा, लेकिन कानूनविदों की मानें तो कोई बहुत अप्रत्याशित राहत मिलने की संभावना कम ही है।
Publish Date: Fri, 12 Jun 2026 08:23:37 AM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jun 2026 08:23:37 AM (IST)
मीनाक्षी नटराजन। फाइल फोटो।HighLights
- कांग्रेस राज्यसभा की संभावित सीट बचाने के साथ-साथ जनमत की लड़ाई भी हार गई
- भाजपा ने नामांकन निरस्तीकरण को कांग्रेस की आंतरिक कलह से जोड़कर प्रभावी नैरेटिव बनाया
- सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस की कानूनी और राजनीतिक चुनौती और बढ़ गई
धनंजय प्रताप सिंह, डिप्टी पॉलिटिकल एडिटर (स्टेट), मध्य प्रदेश। कांग्रेस को दोहरी चोट। पक्की दिख रही राज्यसभा की सीट गई, वहीं नरैटिव की जंग में भी हार हुई। भाजपा ने मध्य प्रदेश के घटनाक्रम पर देश में आसानी से नरैटिव बना दिया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के प्रकरण के लिए कांग्रेस की चुनावी रणनीति और आंतरिक कलह ही जिम्मेदार है।
नामांकन रद करवाने वाले दस्तावेज कांग्रेसशासित तेलंगाना से लीक हुए थे, जो पार्टी में अंदरूनी संघर्ष की गवाही देते हैं। भाजपा यह संदेश भी देने में आगे रही कि अहम चुनाव में नामांकन पत्र में दी जाने वाली जानकारी के प्रति भी कांग्रेस सजग नहीं है।
घिसे-पिटे नारों पर ही टिकी रही कांग्रेस
चुनाव से बाहर हुईं मीनाक्षी को लेकर महिला विरोधी के बजाय कांग्रेस अपने घिसे-पिटे लोकतंत्र की हत्या, सीट चोरी जैसे और लोकतंत्र के हत्यारों की अर्थी यात्रा निकालने जैसी सियासी औपचारिकताओं तक सिमटी रही। यह सब जनता पसंद नहीं करती।
कांग्रेस नेता एकजुट और पार्टी सजग होती तो इसे एक ईमानदार महिला के अपमान का मुद्दा बना सकती थी। मीनाक्षी की छवि ईमानदार राजनेता की है, लेकिन कांग्रेस के लोग ही नहीं चाहते थे कि उसे उभारा जाए।
कांग्रेस चाहती तो इसे महिला आरक्षण और नारी वंदन विधेयक से जोड़कर सहानुभूति बटोर सकती थी। यह पराजय बताती है कि कांग्रेस केवल संख्या बल में ही नहीं, बल्कि चुनावी प्रबंधन और जनता के बीच अपनी छवि बनाए रखने में भी भाजपा से मात खा गई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी उम्मीद
मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद हो जाने के कारण तीनों प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए। कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट में भी किरकिरी का सामना करना पड़ा, जहां गुरुवार को उसे कोई तात्कालिक राहत नहीं मिल पाई। पहले चुनाव आयोग का भी दरवाजा कांग्रेस ने खटखटाया था, लेकिन राहत नहीं मिल पाई।
अब शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की याचिका सुनेगा, लेकिन कानूनविदों की मानें तो कोई बहुत अप्रत्याशित राहत मिलने की संभावना कम ही है।