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मप्र में 'देवी दुर्गा का सबसे दुर्लभ और प्राचीन स्वरूप': विदिशा की उदयगिरी गुफाओं में स्थापित है 1700 साल पुरानी 'द्वादशभुजी' महिषासुरमर्दिनी

मप्र के विदिशा जिले की उदयगिरी गुफाओं में महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा की 12 हाथों वाली प्रतिमा मौजूद है। गुप्तकाल की चौथी-पांचवीं शताब्दी की यह प्...और पढ़ें

By Mithilesh MishraEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 11:10:01 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 11:10:01 AM (IST)
मप्र में 'देवी दुर्गा का सबसे दुर्लभ और प्राचीन स्वरूप': विदिशा की उदयगिरी गुफाओं में स्थापित है 1700 साल पुरानी 'द्वादशभुजी' महिषासुरमर्दिनी
विदिशा जिले की उदयगिरी गुफाओं में महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा की 12 हाथों वाली प्रतिमा मौजूद है। नईदुनिया।

HighLights

  1. उदयगिरी गुफाओं में देवी दुर्गा का दुर्लभ स्वरूप
  2. यह प्रतिमा करीब 1700 साल पुरानी मानी जाती है
  3. अस्त्र-शस्त्रों के साथ उकेरी गई महिषासुरमर्दिनी

मिथिलेश मिश्र, नईदुनिया, भोपाल। भोपाल से करीब 60-65 किमी दूर विदिशा जिले की ऐतिहासिक उदयगिरी गुफाओं में शक्ति पूजा के सबसे पुराने पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं। यहां महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा यानी "महिषासुरमर्दिनी" की ऐसी प्रतिमा है, जिसके 12 हाथ हैं।

गुप्तकाल के दौरान चौथी-पांचवी शताब्दी में बनी यह प्रतिमा मध्य भारत में मिली देवी की सबसे प्राचीन प्रतिमा है।

उकेरा गया देवी का स्पष्ट स्वरूप

देश के चुनिंदा हिस्सों से जो प्रतिमाएं इससे पहले मिली हैं, उनमें देवी का यह स्वरूप इतना स्पष्ट नहीं है। उदयगिरी में गुफा की उत्तरी दीवार पर बनी इस प्रतिमा में उन्होंने महिषासुर की गर्दन दबोच रखी है। दाहिना पैर राक्षस की पीठ पर है और बायां पैर एक आधार पर टिका है, जिसे कुछ लोग उनके वाहन शेर के तौर पर पहचानते हैं।


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1700 साल प्राचीन होने का दावा

दाहिनी ओर के एक हाथ में त्रिशूल है, जिससे उन्होंने राक्षस को बींध रखा है। दूसरे हाथों में तलवार, ढाल, धनुश-बाण, गदा, पानपात्र, खप्पर जैसे अस्त्र-शस्त्र दिखाए गए हैं। करीब 1700 साल पहले उकेरी गई यह प्रतिमा इस क्षेत्र में शक्ति पूजा की सबसे समृद्ध परंपरा की पुष्टि है।

मंदिर रूपी गुफाओं का निर्माण गुप्त काल में चौथी शताब्दी के उत्तरार्द्ध और पांचवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में मालवा विजय के उपलक्ष्य में हुआ था। यहां बनी महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा मध्य भारत में मिली सबसे प्राचीन देवी प्रतिमा है। देश में भी ऐसी गिनी-चुनी प्रतिमाएं ही हैं। दूसरी प्रतिमाओं में देवी के आठ, 10 या कहीं कहीं 20 हाथ दिखाए गए हैं, लेकिन यहां देवी के 12 हाथ हैं। - डॉ. नारायण व्यास, पुरातत्वविद्