
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अयोध्या बायपास को 10 लेन का बनाने का प्रोजेक्ट वाहन चालकों के लिए राहत देने के बजाय फिलहाल जाम की परेशानी बढ़ा रहा है। निर्माण के दौरान छह अंडरपास ऐसे बॉटलनेक बन गए हैं, जहां रास्ता संकरा होने और वैकल्पिक मार्गों की बदहाल स्थिति के कारण वाहन फंस रहे हैं।
यातायात पुलिस ने जाम से निपटने के लिए निर्माण एजेंसी को पांच बिंदुओं पर सुधार के सुझाव दिए थे, लेकिन इन पर पूरी तरह अमल नहीं होने से समस्या बनी हुई है। मिट्टी के ढेर वैसे ही पड़े हैं। कागज पर सुझाए गए समाधान और सड़क पर मौजूद हालात के बीच का अंतर वाहन चालकों को जाम के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
1. कच्चे रास्ते, गड्ढे और गिट्टी: अंडरपास के आसपास यातायात निकालने के लिए बनाए गए वैकल्पिक रास्ते अब तक पक्के नहीं हुए हैं। गड्ढों और गिट्टी के कारण वाहन चालक इनका इस्तेमाल करने से बचते हैं। नतीजतन, मुख्य रास्ते पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
2. 20 फीट के रास्ते पर आमने-सामने वाहन: संकरे मार्ग पर दोनों दिशाओं से वाहन निकलने की कोशिश करते हैं। आमने-सामने वाहन फंसने पर यातायात थम जाता है और पीछे तक कतार लग जाती है।
3. सड़क किनारे मिट्टी-मलबे के ढेर: बायपास पर खोदाई के कारण किनारों पर मिट्टी और मलबा जमा है। इससे वाहनों के टकराने और चालकों के अचानक दिशा बदलने से हादसों का खतरा बना रहता है।
4. खुले कट प्वाइंट से अव्यवस्था: कट चालू होने के कारण वाहन चालक अलग-अलग जगहों से मुड़ते हैं। इससे यातायात की गति टूटती है और जाम की स्थिति बनती है।
5. मौके पर यातायात प्रबंधन की चुनौती: संकरे हिस्सों में वाहनों को व्यवस्थित निकालने के लिए पुलिस की मौजूदगी अहम है। यहां व्यवस्था कमजोर पड़ने पर जाम और बढ़ जाता है।
कच्चे रास्तों को निर्धारित समय के अनुसार पक्का किया जाएगा, ताकि यातायात एक ही रास्ते पर केंद्रित न रहे। हमारे वालंटियर भी मौके पर रहते हैं। - देवांश नुवल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआइ
मौके पर पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। पुलिस ने पांच बिंदुओं पर सुधार के सुझाव दिए थे, जिसके बाद व्यवस्था में सुधार हुआ है। - बसंत कौल, प्रभारी डीसीपी, ट्रैफिक पुलिस