
भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। हमीदिया-सुल्तानिया बिस्तरों के लिहाज से प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल हैं। दोनों अस्पतालों में मिलाकर हर दिन करीब 70 ऑपरेशन होते हैं। लेकिन, इनकी सर्जरी तभी हो सकती है, जब जांचें बाहर से कराकर लाएं। वजह है, हमीदिया अस्पताल में करीब महीने भर से एक दर्जन जरूरी जांचें बंद हैं। किट नहीं होने की वजह से यह जांचें नहीं हो पा रही हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों में हर दिन करीब 200 मरीज बिना जांच लौट रहे हैं। बजट की कमी के चलते किट की खरीदी नहीं हो पा रही है।
दो महीने पहले भी इसी तरह की दिक्कत हुई थी। इसके बाद कुछ दिन के लिए किट आ गईं। अब फिर से वही हालात बन गए हैं। मरीजों को आधी जांचें हमीदिया में और उतनी ही बाहर से करानी पड़ रही हैं। एक जांच पर 150 से लेकर 450 रुपए तक खर्च होते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत इमरजेंसी में आने वाले या भर्ती मरीजों को हो रही है। अपरान्ह 3 बजे से अगले दिन सुबह 9 बजे तक इन मरीजों की सिर्फ सुगर व इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम व पोटेशियम) की जांच की जाती है।
यह जांचें नहीं हो रहीं
ट्राइग्लिसराइड : खून को गाढ़ा करने वाला तत्व
कोलेस्ट्रॉल : नसों को ब्लॉक करने वाले तत्व की जांच
बिलीरुबिन (टोटल व डायरेक्ट) : पीलिया की जांच
सीरम एल्केलाइन फॉस्फेट : लिवर की जांच
सीपीके एमबी : नसों में ब्लॉकेज का रिस्क पता करने के लिए
यूरिया : किडनी की बीमारी, आर्थराइटिस व अन्य की जांच के लिए
क्रेटनिन : किडनी की बीमारी
एचबीए 1सी : डायबिटीज की जांच
सीरम एसिड फॉस्फेट : किडनी की जांच
- कई जरूरी जांचें आज तक शुरू ही नहीं हुईं
हमीदिया अस्पताल की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में हमीदिया-सुल्तानिया के मरीजों की जांच की जाती है। करीब 250 मरीजों की हर दिन 1500 से 1800 जांचें यहां की जाती हैं। मेडिकल कॉलेज होने के बाद यहां कई जरूरी जांचें नहीं हो रही हैं। डॉक्टर निजी लैब से जांच कराने की सलाह देते हैं। विभिन्न विभाग के डॉक्टर हर दिन करीब 40 मरीजों को विटामिन डी व विटामिन बी-12 की जांच कराने की सलाह देते हैं। हमीदिया में यह जांच नहीं हो रही हैं। प्रोस्टेट कैंसर का पता करने के लिए पीएसए, किडनी की बीमारी पता करने के लिए माइक्रो एल्बुमिन साधारण जांचें हैं, जो हमीदिया में नहीं हो रही हैं।