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भानपुर से अब आदमपुर शिफ्ट हुआ कचरा, नगर निगम ने नए एड्रेस पर 6 लाख टन का पहाड़ किया खड़ा

भोपाल में ‘लिगेसी वेस्ट’ खत्म करने के दावों के बीच हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नगर निगम ने समाधान निकालने के बजाय कचरे का सिर्फ ‘पता’ बदला ह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Sun, 01 Mar 2026 07:05:35 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Mar 2026 07:05:35 AM (IST)
भानपुर से अब आदमपुर शिफ्ट हुआ कचरा, नगर निगम ने नए एड्रेस पर 6 लाख टन का पहाड़ किया खड़ा
आदमपुर में खड़ा हो गया कचरे का नया पहाड़।

HighLights

  1. भानपुर से अब आदमपुर शिफ्ट हुआ कचरा।
  2. नगर निगम ने 6 लाख टन का पहाड़ किया खड़ा।
  3. कचरे के पहाड़ खत्म नहीं होने पर पर्यावरणीय जुर्माना।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में ‘लिगेसी वेस्ट’ खत्म करने के दावों के बीच हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नगर निगम ने समाधान निकालने के बजाय कचरे का सिर्फ ‘पता’ बदला है।

2 जनवरी 2018 से शहर का कचरा भानपुर खंती के बजाय आदमपुर छावनी भेजना शुरू किया गया और 25 जनवरी 2018 को भानपुर खंती पर ताला लगा दिया गया।

कागजों में भानपुर को साफ दिखाने की कवायद में कचरे को एक ढेर से दूसरे ढेर में शिफ्ट कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि अब आदमपुर खंती में करीब छह लाख टन कचरे का नया पहाड़ खड़ा हो गया है।

नियम 2026 की चुनौती सामने

देशभर में लागू होने जा रहे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत नगर निकायों के लिए कचरे का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निपटान और डंपिंग साइट्स का पूर्ण उपचार अनिवार्य है। मानक इतने सख्त हैं कि तय समय सीमा में कचरे के पहाड़ खत्म नहीं होने पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना लग सकता है।


भोपाल नगर निगम के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि आदमपुर में कचरे का ढेर कम होने के बजाय हर दिन बढ़ रहा है। शहर से रोजाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है, लेकिन सिर्फ 150 टन का ही निस्तारण हो पाता है। 60-70 टन कचरा रोज खुले में पड़ा रह जाता है।

बस्ती के पास बढ़ता खतरा

आदमपुर खंती में जमा छह लाख टन कचरा अब आसपास की आबादी के लिए मुसीबत बन चुका है। कचरे के ढेर से महज 150 से 200 मीटर की दूरी पर घनी बस्ती है, जहां सैकड़ों लोग रहते हैं।

कचरे से निकलने वाला जहरीला लीचेट और सड़ांध लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर असर डाल रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं।

सिर्फ ‘शिफ्टिंग’ का खेल

निगम ने भानपुर खंती बंद करने का श्रेय तो लिया, लेकिन वहां जमा कचरे को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के बजाय आदमपुर और अन्य खाली भूखंडों में स्थानांतरित कर दिया। ट्रोमेल मशीन और आरडीएफ प्लांट जैसी तकनीकें अब तक फाइलों और ट्रायल रन तक ही सीमित हैं।

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि आदमपुर खंती के कचरे के निस्तारण का प्रस्ताव एमआईसी में भेजा गया है और स्वीकृति के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल हकीकत यही है कि समस्या का स्थायी समाधान अभी दूर है और कचरे का पहाड़ हर दिन ऊंचा होता जा रहा है।