BHEL Bhopal बृजेंद्र वर्मा, भोपाल। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, तब देश में सिर्फ 14000 मेगावॉट बिजली पैदा होती थी। विद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए ज्यादा बिजली घर स्थापित किए जाने थे। इनके लिए भारी विद्युत उपकरणों की बहुत जरूरत थी। यदि विदेशों से भारी उपकरण आयात किए जाते तो करोड़ों रुपए का खर्चा आता है। ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश में भारी उपकरण बनाने का कारखाना स्थापित करने की योजना बनाई। शुरुआत में भेल कारखाने को स्थापित करने भोपाल के बैरागढ़ (अब संत हिरदाराम नगर) में जगह देखी गई। बाद में रायसेन रोड पर गोविंदपुरा, पिपलानी, बरखेड़ा, हबीबगंज इलाके की जमीन पर कारखाना लगाने का फैसला लिया गया।

देश की शान

ब्रिटेन की कंपनी एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ मिलकर भेल कारखाने की 29 अगस्त 1956 में नींव रखी गई। उस समय कारखाने का नाम हैवी इलेक्ट्रिकल्स (इंडिया) लिमिटेड था। एचईएल के पहले प्लांट में उत्पाादन वर्ष 1960 से शुरू हुआ। भारी विद्युत उपकरण निर्माण के अन्य संयंत्र बीएचईएल के नाम से हरिद्वार, हैदराबाद, त्रिची में लगाए गए। भारी उद्योग मंत्रालय भारत सरकार ने 1974 में एचईएल की सभी ईकाइयों का विलय कर एक नाम भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) कर दिया। महारत्न कंपनी भेल की देशभर में 14 यूनिट हैं। इनमें भोपाल भेल मदर यूनिट है। भेल का मुख्यालय दिल्ली में है।

मंदिर, मजिस्द, गुरुद्वारा से पूरे शहर में है पहचान

युवा इंटक अध्यक्ष दीपक गुप्ता बताते हैं कि मेरे पिता रामनाथ गुप्ता भेल में नौकरी की। मेरा बचपन भेल टाउनशिप में ही बीता। कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोग यहां मिलजुल कर रहते हैं। भेल टाउनशिप में बनाया गया चिल्ड्रन, गुलाब, यातायात, आंबेडकर पार्क की पहचान पूरे शहर में है। भेल स्पोर्ट्स क्लब, पिपलानी, जंबूरी और एनसीसी मैदान हैं। बरखेड़ा राममंदिर, हनुमान मंदिर, कालीबाड़ी, गुरुद्वारा, मजिस्द व चर्च हैं। गांधी, बजरंग, विजय मार्केट जैसे कुल 14 बाजार हैं। इनमें 1400 से ज्यादा व्यापारी व्यवसाय कर रहे हैं। इससे भेल टाउनशिप में रहने वाले लोगों को कहीं दूसरे बाजार में नहीं जाना पड़ता। आवश्यकता की सामग्री आसानी से मिल जाती है। शहर के अन्य लोग भी भेल टाउनशिप के पार्कों व मंदिरों में आते हैं।

मेट्रो कोच व ई -वाहनों की मोटर बनाने पर रहेगा जोर

भेल के वरिष्ठ पीआरओ राघवेंद्र शुक्ल ने बताया कि भविष्य में भेल भोपाल में मेट्रो ट्रेन के कोच बनने का काम शुरू होना है। इससे सालाना टर्न ओवर 2 हजार करोड़ बढ़ने से और अधिक लाभ होगा। वहीं पांच मेगावॉट का सोलर प्लांट बनने से बिजली उत्पादन में भेल आत्मनिर्भर बनेगा। बड़े स्तर पर ई-वाहनों की बैटरी बनाने व चार्जिंग प्वाइंट सेंटर विकसित किए जाने गर भी योजना है। मससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

... और ऐसे बस गया अन्ना नगर

भेल में नौकरी करने देश के अलगअलग राज्यों बंगाल, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित दक्षिण भारतीय से बड़ी संख्या में लोग आए, जब भेल कारखाने का काम शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से मजदूर भी आए। बताया जाता है कि 150 से 200 मजदूर यहीं बस गए। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मजदूरों को गोविंदपुरा रेलवे पटरी के पास जगह दिलाई। ऐसे में अन्ना नगर अस्तित्व में आया। वर्तमान में अन्ना नगर में करीब 3 हजार परिवार रह रहे हैं।

भेल के बनाए गए उपकरणों से 83 देशों में स्थापित किए गए हैं कई थर्मल पावर स्टेशन

भेल भोपाल के कारखाने की स्थापना के बाद यहां भारी उपकरण बनाए गए। देश में हर चार घर में एक ऐसा घर होता है, जिसमें जलने वाले बल्ब भेल में बने उपकरणों से जलते हैं। कोयला आधारित ताप विद्युत उत्पादन केंद्र के लिए 195/210/250/270 मेगावॉट के स्टीम टरबाइन का निर्माण, समुद्री जहाज एवं पनडुब्बियों के लिए 15000 एचपी क्षमता के मेरीन टरबाइन, न्यूक्लियर आधारित विद्युत उत्पादन केंद्र के लिए 236/700 मेगावॉट स्टीम टरबाइनों का निर्माण, विद्युत ट्रांसमिशन के लिए उपकरण जैसे पावर ट्रांसफार्मर (1200 किलोवॉट से 1000 मेगावॉट क्षमता), शंटरियेक्टर, ट्रांसफार्मर, पावर केपेसिटर्स, कंडेंसर बुशिंग, वेक्युम स्विचगियर एवं सर्किट ब्रेकर, गैस इंसुलेटेड स्विचगियर सहित रेलवे के इंजन से उपकरण, जनरेटर, इंडक्शन, सिंक्रोनस, इंडक्शन जनरेटर्स, इंडस्ट्रियल अलटर्नेटर, विंड जनरेटर का उत्पादन कर भेल भोपाल की पहचान दुनिया में है। भेल भोपाल कारखाने में बनाए गए उपकरण भारत के अलावा विदेशों में भी आयात किए जाते हैं। परिवहन, अक्षय ऊर्जा, जल, रक्षा व एयरोस्पेस, कैप्टिव पावर प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक उत्पाद के क्षेत्र में भेल का महत्वपूर्ण योगदान है। 83 देशों में भेल के बनाए हुए उपकरणों से कई थर्मल पावर स्टेशन स्थापित किए हैं।

22 हजार कर्मचारियों से शुरू हुआ भेल, अब 5300 कर्मचारी रह गए

शुरुआत में भेल भोपाल में 22 हजार अधिकारी-कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। अब स्थाई 5300 कर्मचारी ही बचे हैं। हर माह की 24 तारीख को भेल में कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। वहीं ठेका श्रमिकों की संख्या करीब 7000 है। भेल कारखाने के कारण गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुआ। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला। गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह बताते हैं कि भेल के कारण गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 1100 छोटे-बड़े कारखाने हैं। 700 एकड़ एरिया में फैले औद्योगिक क्षेत्र में 150 से 200 कारखाने ऐसे हैं, जिन्हें भेल से उपकरण बनाने का काम मिलता है।

Posted By: Prashant Pandey

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