Bhopal Arts News: बुंदेली लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति ने मोहा दर्शकों का मन, निमाड़ी लोकगीतों ने भी बांधा समां
मप्र जनजातीय संग्रहालय में सातत्य श्रंखला के तहत निमाड़ी लोक गायन के अलावा बुंदेली लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। ...और पढ़ें
By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Thu, 10 Mar 2022 05:02:15 PM (IST)Updated Date: Thu, 10 Mar 2022 05:02:15 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। विविध कलानुशासनों की प्रस्तुतियों पर एकाग्र सातत्य के तहत बुधवार को मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में मनीषा शास्त्री एवं साथी, महेश्वर द्वारा निमाड़ी लोक गायन और संजय पांडेय एवं साथी, जबलपुर द्वारा बुंदेली लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत कलाकारों के स्वागत से हुई। कार्यक्रम में सर्वप्रथम निमाड़ी लोक गायन की प्रस्तुति हुई। इसमें कलाकारों ने मूषक चढ़त गणपति आया..., आयो बसंत बहार..., चलो हो सखी गोकुल..., म्हारा घर मा चोक दुरावी..., सात गुफा को रयणु...,हऊ तो घर लीपुं न लीपुं..., नानी नणंद म्हारी... जैसे गीतों को पेश करते हुए श्रोताओं का मनोरंजन किया। मंच पर गायन में मनीषा शास्त्री, सहगायन में संगीता सोनी और सलोनी गीते ने मोर्चा संभाला, वहीं हारमोनियम पर नरेंद्र गीते, तबले पर प्रवीण गीते, ढोलक पर मिहिर आंबेकर, झांझ पर जगदीश पाटीदार ने संगत दी।
करमा गायकी पर आधारित है करमा नृत्य : दूसरी प्रस्तुति बुंदेली लोकनृत्य की दी गई। इस प्रस्तुति में कलाकारों ने बुंदेली बधाई एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी। बुंदेलखंड अंचल में विवाह, त्यौहार आदि मांगलिक अवसरों पर बधाई नृत्य करने की परंपरा है। यह नृत्य देवी देवताओं को धन्यवाद देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस नृत्य के अंतर्गत किए जाने वाले धन्यवाद अथवा बधाई के इस विशेष प्रदर्शन के कारण ही नृत्य का नाम बधाई पड़ा है। इस नृत्य में ढपला, रंतूला, लोटा जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। बुंदेली करमा नृत्य करमा गायकी पर आधारित प्रस्तुति रही। इस नृत्य को भी खुशियों के अवसर पर किया जाता है। कार्यक्रम में अगली प्रस्तुति ढिमरयाई नृत्य की दी गई। प्रस्तुति के दौरान गायन में संजय पाण्डे, रोहित तिवारी, सुदामा चौधरी, प्रेम विश्वकर्मा एवं अन्य ने संगत की।