भोपाल बृजेंद्र ऋषीश्वर कालम : न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी
भोपाल में यह पहला कड़ा कदम है जब शिकायत लोकायुक्त को हुई और हाथ गुलाबी होने से पहले कार्रवाई कर दी गई।
By Ravindra Soni
Edited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sat, 25 Dec 2021 03:07:51 PM (IST)
Updated Date: Sat, 25 Dec 2021 03:07:51 PM (IST)

बृजेंद्र ऋषीश्वर, भोपाल। पुलिस आयुक्त प्रणाली अपराध पर अंकुश की मंशा से लागू की गई, लेकिन जब दामन ही दागदार होगा तो उजले भविष्य के सपने भला कैसे देखेंगे। राजधानी के पुलिस आयुक्त ने इसीलिए घर की सफाई से ही शुरूआत की है। अयोध्या नगर थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया। अब तक शिकायतों के बाद भी बमुश्किल कार्रवाई होती थी। यह पहला कड़ा कदम है जब शिकायत लोकायुक्त को हुई और हाथ गुलाबी होने से पहले कार्रवाई कर दी गई। यानी एक तीर से दो निशाने साधे गए। टीआइ को लाइन भेजकर अधीनस्थों को यह संदेश दिया गया कि अब अड़ीबाजी नहीं चलेगी और दामन को दागदार होने से भी बचा लिया। दरअसल टीआइ के खिलाफ एक बिल्डर ने सात लाख रुपए मांगने की शिकायत लोकायुक्त को की थी। इसकी भनक लगते ही उनकी थाने से ही रवानगी डलवा दी गई, ताकि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।
कब तक बचाएंगे चाचा
राजधानी की पुलिस में इन दिनों भाजपा के एक दमदार नेता के डरपोक दारोगा भतीजे के जमकर चर्चे हैं। असल में आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद हवलदार से लेकर कप्तान तक खुलकर बल्लेबाजी को आतुर हैं। धीमी गेंद को बाउंड्री पार भेजने में जरा भी नहीं चूक रहे। ऐसे में टीम का एक खिलाड़ी, होशंगाबाद रोड का थाना प्रभारी डरपोक साबित हो रहा है। छेड़छाड़ की घटना में भी सबसे पहले फोन बंद हो जाता है। कप्तान इस हरकत से बेहद परेशान हैं। तीन मौके ऐसे आए जब अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजकर सीना चौड़ा किया जा सकता था लेकिन दारोगा मोबाइल बंद करके रजाई में दुबक गए। इस भीरूपन को लेकर उन्हें हटाने का मन तो कई बार बनाया जा चुका है पर हर बार चाचा की नेतागिरी आड़े आ जाती है। हालांकि अब बात यहां तक पहुंच गई कि आखिर भतीजे को चाचा कब तक बचाएंगे।
जुआरियों पर सिंघम मेहरबान
राजधानी का कागजी सिंघम नई बिसात में खामोश है। एसएसपी प्रणाली में कूद कूदकर वाहवाही लूटने वाले ये साहब अब मोहमाया में फंस गए हैं। जुआरी से लेकर कबाड़ी तक, सबसे साठगांठ बनाई जा रही है। किसी ने उनके कान जो फूंक दिए हैं कि सिंघम बनने में कुछ नहीं है, सारा खेल तो माया का है। साहब भी इसे ही हकीकत मान बैठे हैं। हाल का एक मामला ले लें, उनके क्षेत्र की महिलाएं नफीस जुआरी से परेशान होकर शिकायत करने पहुंचीं तो सिंघम ने शिकायत तो गंभीरता से सुनी, लेकिन जुआरी को थाने बुलाकर छोड़ दिया। बाद में महिलाओं ने थाने में शिकायत भी की, थाना प्रभारी ने भी कोई सुनवाई नहीं की। मामला शहर के सफेदपोशों तक पहुंचा तो प्रेसवार्ता के बाद सरेआम चर्चा में आ गया। खबर है अब थाने से पूरी जानकारी मांगी गई है। सिंघम अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा, पुराने अंदाज में ही भलाई है।
साहब तो हमारे दोस्त हैं
वीआइपी थानों में शुमार हबीबगंज संभाग के एसआइ को कानूनी ज्ञान होना महंगा साबित हो रहा है। उनके थाने के अंतर्गत दो पूर्व विधायक आमने-सामने आ गए हैं। उस थाने के नए दारोगाजी को इस मामले की जांच का जिम्मा दिया गया था। वह कार्रवाई करने को लेकर उतावले नजर आ रहे थे। उनके उतावलेपन की जानकारी एक आला अधिकारी को लगी तो एसआइ को चैंबर में बुलाया और उनकी जमकर क्लास ली गई और व्यवहारिक बातें बताईं। बाद में दारोगाजी उनके कमरे से बाहर निकलकर आए और अपने बाकी पुलिस स्टाफ को डीसीपी से अपने दोस्ताना संबंधों का बखान करते हुए कहानी सुनाते नजर आ रहे थे। अंदर की खबर है कि अब आला अधिकारी इन एसआइ को इस मामले से हटाकर एक अनुभवी एसआइ को इसकी जांच सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। हो भी क्यों न, मामला संवेदनशील जो है।