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भोपाल में कैफे और रेस्टोरेंट बने मतांतरण के 'सेफ हाउस', इंटेलिजेंस पर सवाल; पुलिस को नहीं लगी भनक

प्रदेश की राजधानी में लव जिहाद और मतांतरण के बढ़ते मामले कानून व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। ...और पढ़ें

By Brijendra RishishwarEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 05:16:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 05:18:01 PM (IST)
भोपाल में कैफे और रेस्टोरेंट बने मतांतरण के 'सेफ हाउस', इंटेलिजेंस पर सवाल; पुलिस को नहीं लगी भनक
कैफे और रेस्टोरेंट बने मतांतरण के 'सेफ हाउस'

HighLights

  1. राजधानी में नेटवर्क, इंटेलिजेंस को नहीं लगी भनक
  2. सोशल मीडिया से लड़कियों को फंसाने का खुलासा
  3. किन्नरों तक फैले गिरोह की जांच जारी

बृजेंद्र ऋषीश्वर, भोपाल। प्रदेश की राजधानी में लव जिहाद और मतांतरण के बढ़ते मामले कानून व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि शहर में चल रहे इस खतरनाक नेटवर्क का भंडाफोड़ अशोकनगर पुलिस की कार्रवाई से हुआ, जबकि भोपाल पुलिस की भारी-भरकम इंटेलिजेंस शाखा को इसकी भनक तक नहीं लगी।

पुलिस की जांच में क्या निकला

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित इंटरनेट मीडिया के माध्यम फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म का उपयोग कर हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसा रहे थे। नेटवर्क चलाने वाले लोग शहर के बाहरी इलाकों में स्थित उन चुनिंदा कैफे और रेस्टोरेंट्स को सेफ हाउस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके संचालक उनके परिचित हैं।


जिसका उदाहरण 2025 के पिपलानी के आनंद नगर स्थित क्लब 90 रेस्टोरेंट में भी सामने आ चुका है, जिस पर मई 2025 में प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर सीलबंदी की कार्रवाई की थी। वहां लड़कियों से मेल-मुलाकात के बाद उन्हें कथित धर्मगुरुओं से मिलवाया जाता था, जो सुनियोजित तरीके से उनका माइंडवाश करते थे।

किन्नरों तक फैला नेटवर्क

अशोकनगर पुलिस की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह की पहुंच प्रतिष्ठित निजी कालेजों तक है। गिरोह के सदस्य साथी छात्राओं के माध्यम से अन्य लड़कियों से दोस्ती गांठते थे और फिर उन्हें जाल में फंसाकर दैहिक शोषण और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया जाता था। एसडीओपी विवेक शर्मा ने बताया कि पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कुछ किन्नरों का भी इसी गिरोह के माध्यम से मतांतरण कराया गया है। फिलहाल पुलिस उन संदिग्ध मददगारों और धर्मगुरुओं की शिनाख्त में जुटी है, जो भोपाल में बैठकर इसमें मदद कर रहे थे।

इंटेलिजेंस को नहीं लगी खबर

अशोकागार्डन में लगातार लव जिहाद के मामले सामने आने के बाद भी कमिश्नरी के लोकल इंटेलिजेंस को इस कांड की भनक तक नहीं लगी। एक डीसीपी और विस्तृत सेटअप होने के बाद भी भोपाल इंटेलिजेंस शहर में चल रहे मतांतरण के इस खेल को पकड़ने में क्यों विफल रही? अशोकनगर पुलिस की इस कार्रवाई ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। अब दोनों जिलों पुलिस सहयोग से कार्रवाई कर रही है।

कैसे होता है डिजिटल युग में ब्रेनवॉश ?

2025 की जांच में शामिल रहे एक रिटायर्ड डीएसपी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपित इंटरनेट मीडिया के माध्यम इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए लड़कियों की पसंद-नापसंद और उनके अकेलेपन या पारिवारिक तनाव का अध्ययन करते हैं। सहानुभूति हासिल करने के लिए फर्जी नाम और प्रभावशाली व्यक्तित्व का सहारा लिया जाता है। दोस्ती गहरी होने पर धीरे-धीरे उन्हें परिवार और पुराने दोस्तों से काटकर केवल अपने और अपने धर्मगुरुओं के प्रभाव में लाया जाता है।

इस प्रकार से बच सकते हैं-

-किसी भी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसकी प्रोफाइल और म्यूचुअल फ्रेंड्स की गहन जांच करें।

-इंटरनेट मीडिया पर अपनी लोकेशन, स्कूल-कालकज का नाम और निजी जीवन की समस्याओं को सार्वजनिक करने से बचें।

-युवा अपने परिवार और भरोसेमंद मित्रों से निरंतर संवाद रखें। यदि कोई आपको परिवार से दूर करने की कोशिश करे, तो तुरंत सचेत हो जाएं।

-शहर के बाहरी इलाकों में स्थित अनधिकृत कैफे या बंद केबिन वाले रेस्टोरेंट्स में जाने से परहेज करें।

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