भोपाल में फर्जी पासपोर्ट का बड़ा खेल उजागर, बांग्लादेशी नागरिकों ने मठ के पते से पासपोर्ट बनवाए; देशभर में हाई अलर्ट
भोपाल के एक मठ के पते से 40 फर्जी पासपोर्ट जारी होने का खुलासा हुआ। बांग्लादेशी नागरिकों ने फर्जी पहचान से विदेश यात्राएं कीं। गृह मंत्रालय ने हाई अलर...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 02:05:13 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 02:05:13 PM (IST)
भोपाल में फर्जी पासपोर्ट का बड़ा खेल उजागर। (एआई जनरेटेड)HighLights
- भोपाल के मठ पते से 40 फर्जी पासपोर्ट जारी हुए।
- बांग्लादेशी नागरिकों ने बौद्ध अनुयायी बनकर विदेश यात्राएं कीं।
- फर्जी आधार से पैन और जन्म प्रमाण पत्र बनाए।
डिजिटल डेस्क। देश की सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है। राजधानी भोपाल के एक मठ के पते का इस्तेमाल कर दर्जनों बांग्लादेशी नागरिकों ने न सिर्फ फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवा लिए, बल्कि दुनिया के कई देशों की सैर भी कर ली।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस गंभीर खुलासे के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की इमिग्रेशन ब्रांच ने देशभर के सभी एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है। अब यदि इनमें से कोई भी संदिग्ध भारत की सीमा में घुसने या बाहर जाने की कोशिश करता है, तो जांच एजेंसियों को तुरंत इसकी भनक लग जाएगी।
बौद्ध अनुयायी बनकर कीं विदेश यात्राएं
- खुलासा हुआ है कि भोपाल के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट जारी किए गए। एमपी एसटीएफ की जांच में यह बात सामने आई है कि इन बांग्लादेशी नागरिकों ने खुद को बौद्ध अनुयायी बताया और इस फर्जी पहचान के साथ बड़ी आसानी से थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों की यात्राएं भी कर लीं।
- फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन यात्राओं के पीछे इनका असली मकसद क्या था और इसमें कौन से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल हैं।
जाली दस्तावेजों का जाल और असम पहुंची एसटीएफ
- गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह बड़ी ही चालाकी से फर्जी आधार के जरिए पैन कार्ड और नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाता था, जिसके बाद पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था।
- इस नेटवर्क की जड़ें तलाशने के लिए एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम असम में बांग्लादेश सीमा पर पहुंच गई है, ताकि मास्टरमाइंड और स्थानीय मददगारों को दबोचा जा सके। जांच का दायरा अब भोपाल से आगे बढ़कर डबरा (ग्वालियर), छिंदवाड़ा और बैतूल तक पहुंच चुका है। इन चार जिलों में अब तक 70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट मिल चुके हैं।
एक ही नंबर से 17 आवेदन, फिर भी किसी को शक नहीं
इस पूरे फर्जीवाड़े ने पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया और खुफिया पुलिस वेरिफिकेशन की पोल खोलकर रख दी है। सिस्टम पर कई ऐसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनके जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं:
- एक ही पते पर आंखें मूंदकर वेरिफिकेशन: जब अन्ना नगर के एक ही पते से अलग-अलग लोगों के नाम पर लगातार पासपोर्ट के आवेदन आ रहे थे, तो पुलिस सत्यापन के दौरान किसी भी अधिकारी का माथा क्यों नहीं ठनका? इस पैटर्न को पकड़ने में चूक कैसे हुई?
- एक मोबाइल नंबर और 17 पासपोर्ट: डबरा में सामने आए 17 संदिग्ध पासपोर्ट आवेदनों में सिर्फ एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। यह सीधा और स्पष्ट 'कॉमन लिंक' होने के बावजूद सिस्टम ने इन आवेदनों को संदिग्ध क्यों नहीं माना और इन्हें पास कैसे कर दिया गया?
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