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महंगी गैस ने बिगाड़ा जायका, भोपाल में होटलों से लेकर स्ट्रीट फूड तक बढ़े खाने की चीजों के दाम

भोपाल में कमर्शियल और पांच किलो वाले छोटू एलपीजी सिलिंडर के दाम बढ़ने से होटलों से लेकर स्ट्रीट फूड तक महंगा हो गया है।

By dilip mangtaniEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 03 Jun 2026 01:39:37 PM (IST)Updated Date: Wed, 03 Jun 2026 02:09:49 PM (IST)
महंगी गैस ने बिगाड़ा जायका, भोपाल में होटलों से लेकर स्ट्रीट फूड तक बढ़े खाने की चीजों के दाम
भोपाल की दुकानों में बढ़ गया खाने के सामान का रेट।

HighLights

  1. सिलिंडर दाम डेढ़ गुना बढ़े, होटलों ने बढ़ाए मेनू के रेट, तवा रोटी की जगह तंदूरी रखी
  2. स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की मजबूरी, समोसा कचौड़ी मोमोज चाय सब पर पड़ी महंगाई की मार
  3. छोटू सिलिंडर की मांग घटी, मजदूर छात्रों के लिए रसोई खर्च बढ़ा, कनेक्शन मिलना मुश्किल

दिलीप मंगतानी, नवदुनिया, भोपाल। कमर्शियल सिलिंडरों और पांच किलो वाले छोटू सिलिंडर के दाम फिर बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर खानपान सेवाओं पर पड़ा है। बड़े होटलों के साथ अब स्ट्रीट फूड का जायका भी तीखा हो गया है।

नई बढ़ोतरी के साथ ही भोजन की खाली महंगी हो गई है। कुछ ही समय में सिलिंडर के दाम डेढ़ गुना होने के कारण होटल संचालकों ने मेनू में बदलाव के साथ भाव भी बढ़ा दिए हैं। कचौड़ी, समोसा और पोहा जैसे स्ट्रीट फूड भी महंगे हो रहे हैं।


होटल एवं कैटरिंग व्यवसाइयों का कहना है कि हाल ही में पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने के साथ परिवहन लागत बढ़ गई है। अब कामर्शियल सिलिंडरों के दाम माह-दर-माह बढ़ाए जा रहे हैं, इससे खानपान सेवाओं का संचालन महंगा होने लगा है। पिछले माह कामर्शियल प्रति सिलिंडर 993 रुपये बढ़ाए गए। अब 42 रुपये बढ़ाए गए हैं। भोजन बनाने का सबसे बड़ा खर्च गैस, तेल एवं मसाले हैं। तीनों महंगे हो चुके हैं।

रोटी बनाने में लगती है ज्यादा गैस

इस कारण होटल संचालकों को दाम बढ़ाने पड़े हैं। रोटी से लेकर दाल, पनीर तक महंगा हो गया है। प्रति डिश लगभग 10 प्रतिशत तक की ब़ढ़ोतरी की जा चुकी हैं। कुछ होटल संचालकों ने तवा रोटी बनाना बंद कर दी है। अब उनके मेनू में तंदूरी रोटी का ही विकल्प है। तवा रोटी बनाने में गैस का अधिक उपयोग होता है।

हाल ही में तंदूर के संचालन को पुन: अनुमति दी गई है। चाट, समोसा, कचौरी, मोमोज, चाय और अन्य फास्ट फूड बेचने वाले छोटे कारोबारियों का कहना है कि उनकी कमाई का मार्जिन पहले ही सीमित है। गैस महंगी होने के कारण दाम बढाना मजबूरी है।

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छोटू सिलेंटर की मांग कम हुई

कंपनियों ने पांच किलो वाले एफटीएल सिलिंडर को भी कामर्शियल मान लिया है। इसके दाम घरेलू सिलिंडर की अपेक्षा अधिक हैं। गैस एजेंसियों के अनुसार यह छोटू सिलिंडर आमतौर पर ग्रामीण इलाकों के श्रमिक एवं असंगठित मजूदर, गरीब एपं छात्र आदि करते हैं।

दाम बढ़ने से इसकी मांग कम हो गई है। लोग अब यह प्रयास कर रहे हैं कि वे सामान्य घरेलू सिलिंडर की उपयोग करें, लेकिन फिलहाल नये घरेलू कनेक्शन मिलना आसान नहीं है। निचले तबके की रसोई का खर्च बढ़ चुका है।

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मेनू में बदलाव करना पड़ा है

कामर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ने से हमें मेनू में बदलाव करना पड़ा है। कुछ डिश के दाम बढ़ाए गए हैं। कैटरिंग कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। नियमित कारोबार भी कम हुआ है। यदि भविष्य में सिलिंडरों के दाम कम न हुए तो कैटरिंग कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। - प्रवीण तिवारी, होटल एवं कैटरिंग कारोबारी

रेगुलर डिश के दाम बढ़ाना मजबूरी

कामर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ने के बाद हमें रेगुलर डिशों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। अभी प्रति डिश 20 रुपये की बढ़ोतरी की है क्योंकिलागत बहुत बढ़ गई है। खाना महंगा हो चुका है। मिठाई एवं स्वीट के दाम भी बढ़े हैं। कुछ चीजें हम इंडक्शन पर बना रहे हैं। लागत के मुकाबले दाम में कम बढ़ोतरी की है। - राजू चंचल, होटल एवं रेस्त्रां व्यवसाई

एफटीएल सिलिंडरों की मांग कम

पांच किलो वाले एफटीएल जिसे छोटू सिलिंडर भी कहा जाता है इसकी मांग कम हो गई है क्योंकिइसके दाम भी लगभग कामर्शियल सिलेंडर के समान ही पड़ता है। शहर, गांव में मजदूरी करने वालों के लिए यह कठिन समय है। उनके पास आसान विकल्प भी नहीं है। - मनीष गोपलानी, एलपीजी गैस वितरक

10 प्रतिशत दाम बढ़ाने पड़े हैं

लगातार बढ़ती महंगाई के बीच का कामर्शियल सिलिंडरों के दाम लगातार बढ़ना चिंता का विषय है। महंगा होने के बावजूद उपलब्धता सीमित है। हमनें 10 प्रतिशत दाम बढ़ाए हैं। यही हाल रहा तो दाम और बढ़ाने होंगे। हम चाहतें किग्राहक पर कम भार पड़े। होटलों का प्राफिट प्रभावित हुआ है। - तेजकुलपाल सिंह पाली, अध्यक्ष होटल एवं रेस्टोरेंट संघ भोपाल