
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दिसंबर 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी से जुड़े आपराधिक मामले में गुरुवार को भोपाल जिला न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हेमलता अहिरवार की अदालत में मुख्य मुद्दा यह रहा कि अमेरिका की डाउ केमिकल कंपनी पर भारतीय अदालतों का अधिकार क्षेत्र लागू होता है या नहीं। डाउ केमिकल को यूनियन कार्बाइड कारपोरेशन की उत्तराधिकारी कंपनी माना जाता है।
पिछली सुनवाई में सीबीआई ने अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर अपनी दलीलें पूरी कर दी थीं। जांच एजेंसी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 177 का हवाला देते हुए कहा था कि अपराध जहां हुआ है, मुकदमे की सुनवाई वहीं होनी चाहिए। इसके अलावा डाउ को गृह मंत्रालय और अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से समन पहुंचाए जाने की बात भी रखी गई थी।
गुरुवार को गैस पीड़ितों के संगठन भोपाल ग्रुप फॉर इन्फार्मेशन एंड एक्शन की ओर से दलीलें रखी गईं। संगठन के अधिवक्ता ने अदालत से डाउ केमिकल को यूनियन कार्बाइड के साथ विलय और कंपनी के एकीकरण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की। उनका तर्क था कि डाउ एक ओर यूनियन कार्बाइड अमेरिका को अलग कंपनी बता रही है, जबकि संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर रही है।
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संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि यूनियन कार्बाइड पर भारतीय कानून के तहत गंभीर धाराओं में आरोप हैं और वर्ष 1992 से उसकी भारतीय संपत्तियां कुर्क हैं। डाउ के भारतीय अदालतों में पूर्व में उपस्थित होने का भी उल्लेख किया गया। अगली सुनवाई नौ अक्टूबर को होगी। उस दिन पीड़ित संगठनों की शेष दलीलें जारी रहेंगी, जबकि सीबीआइ लिखित प्रस्तुति दाखिल करेगी।