
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। 90 डिग्री अंधे मोड़ के अजूबे डिजाइन की वजह से चर्चा में आया भोपाल के ऐशबाग का रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) इंजीनियरिंग की भूल का इकलौता नमूना नहीं है। यहां पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान बने दो और पुलों की डिजाइन में भी गंभीर खामियां हैं। ऐशबाग आरओबी समेत तीनों पुल खतरनाक मोड़ और बेतुके उतार की वजह से दुर्घटनाओं का आमंत्रण देते हैं। नईदुनिया टीम ने रविवार को सिटी प्लानिंग विशेषज्ञ सुयश कुलश्रेष्ठ के साथ खतरनाक बने ऐशबाग आरओबी, आंबेडकर फ्लाइओवर और बावड़िया कला आरओबी पर जाकर वह गलतियां देखीं और खामियों की वजह तलाश की गई।
ऐशबाग आरओबी के रेल लाइन के ऊपर के स्लैब से एप्रोच रोड को जोड़ने के लिए 200 से 300 मीटर का कर्व दिया जाना चाहिए था। वहां इंजीनियरों ने करीब 90 डिग्री का मोड़ बना दिया है। यही इस ब्रिज की सबसे बड़ी खामी है। यह मोड़ आइआरसीए के नियम के बिल्कुल विपरीत है। ऐसा मोड़ किसी भी ब्रिज में नहीं बनाया जाता। इस मोड़ की वजह से बड़े वाहन मुड़ ही नहीं पाएंगे। छोटे वाहन भी अगर तेज रफ्तार में गुजरे तो उनके अंधे मोड़ पर पुल से नीचे गिरने का खतरा है। सामने से आ रहा ट्रैफिक तो किसी को दिखेगा ही नहीं। स्लैब के ऊपर केवल ढाई फीट का फुटपाथ दिया गया है, जो अंत में जाकर दो फीट भी नहीं बचता। कोई भी सुविधाजनक ढंग से चल नहीं सकता। मानक के मुताबिक ऐसा फुटपाथ तीन से साढ़े तीन फीट का बनना चाहिए।
शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके में 126 करोड़ की लागत से बना डा. भीमराव आंबेडकर सेतु भी अजूबा है। इसकी तीनों भुजाएं दुर्घटना बहुल क्षेत्र बन चुकी हैं। इसका सबसे अधिक खतरनाक हिस्सा भोपाल हाट चौराहा है। इस पुल की एक भुजा ठीक चौराहे के रेड लाइट पर उतरती है। यहां आने-जाने वाले वाहनों की भीड़ होती है। अक्सर वाहनों की टक्कर होती रहती है। गायत्री मंदिर डाक भवन के सामने चौराहे पर कोई रोटरी नहीं है। इस कारण यहां पर वाहन आमने-सामने आते हैं। मेट्रो शुरू हो जाने के बाद यहां खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
वहीं, गणेश मंदिर की तरफ उतरने वाली भुजा से किसी दूसरे हिस्से में जाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। नियम से चले तो सीधे सावरकर सेतु पर चढ़ना होगा। लोग अरेरा कालोनी अथवा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन जाने के लिए गलत मुड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। पुल के ऊपर भी स्लोप की गलतियां थीं, जिन्हें ठीक करने के लिए पुल को एक बार बंद किया गया था।
बावड़िया कला रेलवे क्रासिंग पर 2019 में लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से बना आरओबी गलत डिजाइन की वजह से एक्सीडेंट जोन बन चुका है। नर्मदापुरम की तरफ उतरने वाली भुजा बाग सेवनिया थाने के सामने सर्विस रोड पर उतरती है। कटारा हिल्स की तरफ से आने वाला ट्रैफिक उस पुल का इस्तेमाल करने के लिए गलत दिशा से सड़क पार कर उसपर चढ़ता है। वह उतरने वाले ट्रैफिक के लिए खतरा बन जाता है। दानापानी रोड की तरफ उतरने वाली भुजा भी एक व्यस्त चौराहे पर उतरती है। वहां हमेशा ट्रैफिक जाम रहता है। इसके अलावा आरओबी के घटिया निर्माण की वजह से कई बार पुल पर पैचवर्क किया जा चुका है।
प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि ऐशबाग के 90 डिग्री मोड़ को चौड़ा करके सुधारा जा सकता है। ऐशबाग से पुल बोगदा की तरफ आने वाली भुजा की दूसरी तरफ पांच फीट का कर्व देने की जगह है। उधर से मोड़ को गोलाई दी जा सकती है। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो मोड़ के आसपास अधिक से अधिक ब्रेकर बनाने होंगे। 90 डिग्री मोड़ पर दोनों तरफ बड़ा आइना लगाए जाएं। रेलवे पटरी के ऊपर बने स्लैब पर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं।