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झीलों के शहर को ये कैसा तमगा? देश के टॉप-10 झुग्गी वाले शहरों में शुमार हुआ भोपाल ; 4,000 एकड़ में तनीं 2 लाख से ज्यादा झुग्गियां!

राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए पिछले 42 साल से दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ये सिर्फ सरकारी फाइलों और भाषणों तक ही सीमित रहे हैं। झुग्गियों की संख्या से तेजी से बढ़ गई है। एक सर्वे के अनुसार, भोपाल देश के सबसे ज्यादा झुग्गी वाले टाप-10 शहरों में शामिल हो गया है।

By anuj mainaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 17 May 2026 11:27:24 AM (IST)Updated Date: Sun, 17 May 2026 11:35:20 AM (IST)
झीलों के शहर को ये कैसा तमगा? देश के टॉप-10 झुग्गी वाले शहरों में शुमार हुआ भोपाल ; 4,000 एकड़ में तनीं 2 लाख से ज्यादा झुग्गियां!
री-डेंसिफिकेशन और पीएम आवास योजनाओं के बावजूद भोपाल में अतिक्रमण और बस्तियों का विस्तार जारी। नईदुनिया।

HighLights

  1. भोपाल में 400 से अधिक झुग्गी बस्तियों में दो लाख से ज्यादा परिवार रह रहे हैं, जो करीब 4 हजार एकड़ जमीन पर फैली हैं
  2. 42 साल में कई सरकारों ने “झुग्गी मुक्त भोपाल” के दावे किए, लेकिन राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक विफलता के कारण योजनाएं सफल नहीं हो सकीं
  3. राजधानी की 72 बड़ी झुग्गी बस्तियां करीब 650 एकड़ प्राइम सरकारी जमीन पर फैली हैं, जिनमें बाणगंगा, रोशनपुरा और अन्ना नगर प्रमुख हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल को “झुग्गी मुक्त” बनाने का सपना पहली बार 1984 में दिखाया गया था। तब शहर में मुश्किल से 25 झुग्गी बस्तियां थीं। चार दशक बाद तस्वीर बिल्कुल उलट है। हालत यह है कि राजधानी देश के सर्वाधिक झुग्गियों वाले टॉप-10 शहरों में शामिल हो चुकी है।

अब झीलों के शहर भोपाल में 400 से अधिक झुग्गी बस्तियां हैं, जहां दो लाख से ज्यादा परिवार रहते हैं।

सरकारी योजनाएं आती रहीं, भाषण होते रहे, सर्वे बनते रहे, लेकिन जमीन पर झुग्गियों का फैलाव लगातार बढ़ता गया। आज राजधानी की करीब चार हजार एकड़ कीमती सरकारी जमीन पर झुग्गियों का साम्राज्य खड़ा हो चुका है।

2013 के बाद और तेजी से बढ़ीं बस्तियां

2013 के सर्वे में भोपाल में 388 झुग्गी बस्तियां दर्ज थीं, जिनमें करीब डेढ़ लाख झुग्गियां थीं। अब यह संख्या बढ़कर 400 के पार पहुंच गई है और झुग्गियों की संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी है।

शहर के सबसे प्राइम और महंगे इलाकों में भी झुग्गियां फैल चुकी हैं। रोशनपुरा, बाणगंगा, अन्ना नगर, वल्लभ नगर, राहुल नगर, पंचशील नगर और विश्वकर्मा नगर जैसी बस्तियां अब राजधानी के नक्शे का स्थायी हिस्सा बन चुकी हैं।

72 बड़ी बस्तियां, 650 एकड़ प्राइम जमीन पर कब्जा

जानकारी के अनुसार राजधानी की 72 बड़ी झुग्गी बस्तियां अकेले करीब 650 एकड़ सरकारी और प्राइम लोकेशन की जमीन पर फैली हुई हैं।

सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में बाणगंगा, रोशनपुरा, बाग सेवनिया, अन्ना नगर और विश्वकर्मा नगर शामिल हैं। इनमें हजारों परिवार वर्षों से रह रहे हैं।

झुग्गी बस्ती क्षेत्रफल (एकड़ में) अनुमानित आबादी
बाणगंगा 48 50,000
रोशनपुरा 17 45,000
बाग सेवनिया 16 40,000
विश्वकर्मा नगर 6 37,000
अन्ना नगर 51 32,000
भीम नगर 72 15,000

झुग्गियों की राजनीति ने बिगाड़ी शहर की तस्वीर

राजधानी भोपाल में झुग्गियों का मुद्दा केवल अतिक्रमण या आवास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले चार दशकों में यह पूरी तरह राजनीतिक संरक्षण और वोट बैंक की राजनीति का केंद्र बन गया। हर चुनाव में झुग्गी बस्तियों को नियमित करने, पट्टे देने, बिजली-पानी कनेक्शन उपलब्ध कराने और पक्के मकान देने के वादे किए गए, लेकिन स्थायी समाधान कभी नहीं निकला।


राजनीतिक दलों ने झुग्गीवासियों को अपने स्थायी वोट बैंक के रूप में देखा। यही कारण रहा कि नई झुग्गियां बसती रहीं और प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर चुनावी समीकरणों के आगे कमजोर पड़ती गई।

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“झुग्गी मुक्त भोपाल” का नारा रह गया सपना

1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने “झुग्गी मुक्त भोपाल” का नारा दिया था। उस समय शहर में लगभग 25 झुग्गी बस्तियां थीं। इसके बाद अलग-अलग सरकारों ने अलग-अलग मॉडल पेश किए। बाबूलाल गौर सरकार ने 2004 में री-डेंसीफिकेशन योजना लागू की, जिसमें झुग्गी क्षेत्रों में ही बहुमंजिला आवास बनाकर लोगों को बसाने की योजना थी।

किराए पर दे दिए सरकारी मकान

शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों मकान और पट्टे वितरित किए गए। कई जगह मल्टी स्टोरी फ्लैट बनाए गए, लेकिन उनमें बड़ी संख्या में हितग्राही शिफ्ट नहीं हुए। कुछ स्थानों पर लोगों ने फ्लैट किराए पर दे दिए और वापस झुग्गियों में आकर रहने लगे।

राजनीति और झुग्गियों का तालमेल

राजनीतिक दबाव के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी लगातार विवादों में रही। जब भी प्रशासन झुग्गियां हटाने पहुंचा, स्थानीय नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया। कई बार झुग्गीवासियों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन हुए और कार्रवाई अधूरी छोड़नी पड़ी।

सरकारी जमीनों पर तेजी से बढ़ रहे कब्जे

भोपाल में भेल, राजस्व और नगर निगम की खाली जमीनों पर सबसे ज्यादा कब्जे हुए हैं। पिपलानी, हबीबगंज, गोविंदपुरा, बरखेड़ा सेक्टर, पिपलिया पेंदे खां, बरखेड़ा पठानी और पद्मनाभ नगर क्षेत्रों में हजारों झुग्गियां खड़ी हो चुकी हैं।

मिसरोद से बाग मुगालिया और अयोध्या नगर से भानपुर तक सरकारी जमीनों पर लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है।

वीआईपी इलाकों में भी बढ़ीं झुग्गियां

साल 1990 में मंत्रालय और वीआईपी रोड क्षेत्र के आसपास करीब 1200 से 1500 झुग्गियां थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 10 हजार तक पहुंच चुकी है।

यानी जिस भोपाल को “स्मार्ट सिटी” बनाने की कोशिश हो रही है, उसी शहर का एक बड़ा हिस्सा आज भी झुग्गियों के विस्तार और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भोपाल में झुग्गियों की बढ़ती संख्या के पीछे केवल गरीबी या पलायन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध शहरी नीति की कमी और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव भी बड़ा कारण है।

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