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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal IT Raid: सौरभ शर्मा को अनुकंपा से मिली थी RTO में नौकरी… पढ़िए भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा करने की पूरी कहानी

मध्य प्रदेश के भोपाल में परिवहन विभाग में आरक्षक रहे सौरभ शर्मा के यहां आईटी और लोकायुक्त की छापेमारी को लेकर हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। सौरभ ...और पढ़ें

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Sun, 22 Dec 2024 07:37:10 AM (IST)Updated Date: Mon, 23 Dec 2024 11:56:30 AM (IST)
Bhopal IT Raid: सौरभ शर्मा को अनुकंपा से मिली थी RTO में नौकरी… पढ़िए भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा करने की पूरी कहानी
सौरभ शर्मा (इनसेट) और छापेमारी के दौरान घऱ से मिले आभूषण। (स्रोत- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. भ्रष्टाचार की कमाई से सौरभ ने बनाई थी अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी
  2. कंपनी ड्राइवर चेतन सिंह गौर व अन्य रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्टर
  3. आरक्षक रहते चिरूला बैरियल का ठेका लिया था, फिर खुद बांटे ठेके

अमित मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग में आरक्षक रहे सौरभ शर्मा ने भ्रष्टाचार की काली कमाई को सफेद करने के लिए अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई थी। जिस चेतन सिंह गौर को सौरभ का महज ड्राइवर समझा जा रहा था, उसके साथ शरद जायसवाल और रोहित तिवारी इस कंपनी में डायरेक्टर हैं।

22 नवंबर 2021 को शुरू की गई यह कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्वालियर स्थित दफ्तर से पंजीकृत हुई थी। कंपनी भोपाल के अरेरा कालोनी ई-7 के पते पर रजिस्टर्ड कराई गई। यहीं, लोकायुक्त पुलिस की टीम ने दो दिन पहले छापा मारकर करोड़ों रुपये और सोना-चांदी बरामद किया।


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(सौरभ शर्मा और उनकी पत्नी दिव्या, जिनके भोपाल स्थित घर पर लोकायुक्त ने छापा मारा था।)

पूर्व मंत्री की भूमिका पर भी उठे सवाल

  • कंपनी की शुरुआती लागत 10 लाख रुपये थी। कंपनी का टर्न ओवर नहीं खोला गया है। 31 मार्च 2023 को कंपनी की आखिरी एनुअल मीटिंग हुई थी। ऐसा कहा जा रहा है कि शरद सौरभ का साझीदार है और दोनों की मुलाकात एक पूर्व मंत्री ने कराई थी।
  • सौरभ परिवहन विभाग में ही कार्यरत स्टेनो का रिश्तेदार है। अनुकंपा नियुक्ति कराने के लिए इसी रिश्तेदार ने तार जोड़े, फिर स्टेनो के जरिए ही उसने परिवहन विभाग के दाव-पेंच सीखे और रिश्तेदार को दरकिनार कर एक पूर्व मंत्री का खास बन गया।

  • सौरभ ने पहले अपने स्टेनो रिश्तेदार के जरिए चिरूला बैरियर को ठेके पर लेकर चलवाया। उसे कमाई का चस्का लगा तो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सभी बैरियर का ठेका वह लेता था।
  • फिर अपने हिसाब से टीएसआई, आरटीआई को बैरियर का ठेका देता था। बाकायदा बैरियर की बोली लगवाता था, लेकिन प्राइवेट कटर इसी के रहते थे। जो पूरा हिसाब-किताब रखते थे। इस पर आने वाले पूरे पैसे का हिसाब रखकर खुद ही पैसा बांटता था।
  • उसकी इस मनमानी का विरोध विभाग में ही होने लगा था। कई टीएसआई, आरटीआई ने इस तरह काम करने से इन्कार कर दिया तो फिर सौरभ ने परिवहन विभाग की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
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    दो बार पीएससी मुख्य तक पहुंचा, अनुकंपा नियुक्ति से लगा

    पैसा कमाने का चस्का प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले मनोज शर्मा बताते हैं कि सौरभ पढ़ने में बहुत होशियार था। कोचिंग के टेस्ट में अव्वल आता था। उसमें प्रतिभा थी। दो बार उसने एमपीपीएससी दी और प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की मुख्य परीक्षा तक पहुंचा।

    एक बार साक्षात्कार में रह गया। इसी दौरान पिता के निधन के बाद उसकी अनुकंपा नियुक्ति परिवहन विभाग में हो गई। यहां से उसे पैसा कमाने का चस्का लगा।

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    राजदार ही मुखबिर

    सामने आया है कि सौरभ के दो राजदार ही सबसे बड़े मुखबिर हैं। मेंडोरी के जंगल में सोने और रुपये से भरी गाड़ी की सूचना इन्हीं के जरिए पहुंचाई गई। परिवहन विभाग में आने के बाद सबसे पहले जो सौरभ का करीबी था, उसने एक साझेदार से सारे राज उगलवाए, फिर एजेंसियों तक यह जानकारी पहुंचाई।

    जिस साझेदार ने राज खोले, उसके नाम से भी सौरभ द्वारा संपत्तियां लिए जाने की बात कही जा रही है। इसके यहां छापे नहीं पड़े, क्योंकि यह मुखबिर है। टाइल्स के नीचे चांदी की सूचना भी इसी के जरिए लोकायुक्त पुलिस की टीम तक पहुंची थी।

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