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भोपाल मेट्रो के मुआवजे पर जबलपुर HC सख्त, कहा- 2 हफ्ते में दें जवाब; पीड़ितों का आरोप- जमीन तो ले ली, मुआवजा कहां?

भोपाल मेट्रो के लिए ली गई जमीन का मुआवजा न मिलने पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि 2 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट न देने पर भोपाल...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 01:35:34 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 01:35:34 PM (IST)
भोपाल मेट्रो के मुआवजे पर जबलपुर HC सख्त, कहा- 2 हफ्ते में दें जवाब; पीड़ितों का आरोप- जमीन तो ले ली, मुआवजा कहां?
भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में देरी पर जबलपुर HC ने राज्य सरकार और प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट मामले में जबलपुर HC ने मध्य प्रदेश शासन पर कड़ा रुख अपनाया
  2. कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगले 2 हफ्तों में जवाब नहीं आया तो कलेक्टर की पेशी होगी
  3. इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होने वाली है

एमपी डेस्क, जबलपुर. भोपाल मेट्रो से जुड़ा एक मामले जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में कोर्ट ने मध्यप्रदेश प्रशासन पर भी कई सवाल उठाए हैं। दरअसल, कई साल पहले भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहित किए गए थे। लेकिन, अब तक इससे प्रभावित प्मकान-जमीन मालिकों को उनका हक (मुआवजा) नहीं मिला।

मामले की सुनवाी के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने कहा कि अगर अगले दो हफ्तों में प्रशासन ने इस पर स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं की, तो भोपाल कलेक्टर को खुद अदालत में हाजिर होकर जवाब देना होगा। इस मामले की अलगी सुनवाई 17 अगस्त को होगी।


क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद भोपाल निवासी जाकिर अली खान और जाहिदा बी की तरफ से दाखिल की गई अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के निर्माण के लिए उनकी कीमती जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद उन्हें नियमानुसार मुआवजा नहीं दिया गया। बार-बार चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ितों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरीन कोर्ट ने क्या कहा..

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ढिलाई पर सख्त रुख दिखाया। कोर्ट ने सवाल किया- इसके लिए याचिकाकर्ताओं को अब तक मुआवजा मिला या नहीं? अगर भुगतान रुका हुआ है, तो इसके पीछे की असली वजह क्या है? किसी की जमीन अधिग्रहित करने के बाद उसे समय पर मुआवजा देना सरकार की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। इस प्रक्रिया में गैर-जरूरी देरी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा- इसलिए अब तक की गई पूरी कार्रवाई की डीटेल्ड जानकारी और मुआवजा भुगतान की सटीक स्थिति दो सप्ताह के अंदर एफिडेविट के साथ कोर्ट में जमा की जाए। अगर तय समयसीमा में जवाब दाखिल नहीं होता है, तो भोपाल कलेक्टर को कोर्ट में उपस्थित होकर इसका जवाब देना होगा।

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