
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नियोजित विकास के लिए दो दशक से अटके नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आखिरकार जारी कर दिया गया है। यह नया ड्राफ्ट विजन 2047 को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें अगले दो दशकों की आबादी, बुनियादी ढांचे, ट्रांसपोर्ट और पर्यावरण की जरूरतों का ध्यान रखा गया है।
भोपाल का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2005 में आया था। इसके बाद से शहर तदर्थ नीतियों और सीलिंग जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों के बीच अनियंत्रित रूप से फैलता रहा, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों के तहत हर दस साल में नया मास्टर प्लान आना चाहिए और प्रत्येक पांच साल में उसकी समीक्षा अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए, लेकिन भोपाल में दो दशक तक यह प्रक्रिया अटकी रही। इधर प्रदेश में नए भूमि विकास नियम-2026 की प्रक्रिया भी समानांतर चल रही है।
भोपाल का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 1995 में लागू हुआ था। तब शहर की आबादी 10 से 15 लाख के बीच थी। इसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो चुकी है। वर्ष 2010 में मास्टर प्लान-2021 का प्रारूप तैयार किया गया था। इसमें 813 वर्ग किमी क्षेत्र और 196 गांव शामिल किए गए थे। प्रारूप को लेकर कई आपत्तियां थीं, इसके बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इससे शहर का सुनियोजित के स्थान पर बेतरतीब विकास हुआ। जहां-तहां मार्केट बन गए। रहवासी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी दुकानें, माल बन गए। इससे रहवासियों को समस्या हुईं। यातायात गड़बड़ाया। जाम की स्थिति बनने लगी।