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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 23, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal News: विकास के नाम पर बलिदान हो रहे 35 से 50 वर्ष पुराने 947 पेड़

न्यायालय के आदेश की हो रही अवहेलना। क्षतिपूर्ति स्‍वरूप पौधे लगाने की अब तक नहीं बनी योजना।

By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sat, 23 Apr 2022 03:50:10 PM (IST)Updated Date: Sat, 23 Apr 2022 03:50:10 PM (IST)
Bhopal News: विकास के नाम पर बलिदान हो रहे 35 से 50 वर्ष पुराने 947 पेड़

भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। नगरीय क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई से पहले नियमानुसार योजना बनाई जानी चाहिए कि हरियाली के नुकसान की क्षतिपूर्ति कैसे की जाएगी? इसके लिए कितने पौधे लगाए जाना है और उन्हें कहां लगाया जाएगा? इसके बाद ही पेड़ काटे जाना चाहिए, लेकिन नगर निगम और सीपीए के अधिकारियों ने विकास की आड़ में सुभाष फाटक के नजदीक स्थित स्टड फार्म की जमीन पर बिना क्षतिपूर्ति योजना के 947 पेड़ काटने की अनुमति दे दी।ये सभी बड़े पेड़ हैं, जिनकी आयु 35 से 50 साल के बीच हैं। यहां मेट्रो का डिपो बनाया जाना है।

वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में पेड़ को काटने से पहले इनके क्षतिपूर्ति वाले पौधे लगाने के लिए स्थान तय करना होगा। इसके बाद ही पेड़ काटने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन निगम अधिकारियों ने भी नियमों के खिलाफ जाकर पेड़ काटने की अनुमति जारी कर दी। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इन पेड़ों के कटने से बायोडायवर्सिटी को भी खतरा है। स्टड फार्म का क्षेत्र बहुत पुराना है। इसलिए इन पेड़ों पर कई प्रजाति के कीट-पतंगे व पक्षियों का बसेरा था। इन पेड़ों के कटने से इनके आश्रय पर भी संकट पैदा हो गया है।


एक लाख 74 हजार रुपये के बराबर एक साल में आक्सीजन देता है एक पेड़

कोलकाता में 250 पेड़ काटने के एक मामले में इससे होने वाले नुकसान का आंकलन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अलग से एक एक्सपर्ट कमेटी का पैनल बनाया था। इस पैनल ने फरवरी 2021 में सुप्रीमकोर्ट को जो रिपोर्ट सौंपी उसके अनुसार एक हेरिटेज पेड़ या बड़ा पेड़ प्रतिवर्ष एक लाख 74 हजार रुपये के बराबर आक्सीजन देता है। यदि ये पेड़ सौ साल तक रहता है तो एक करोड़ रुपये से अधिक राशि के बराबर प्राणवायु लोगों को मिलती है। ऐसे में वैज्ञानिक तर्को और सुप्रीम कोर्ट के आधार पर 947 पेड़ों से सौ साल में करीब 974 करोड़ रुपये से अधिक की आक्सीजन वायुमंडल को मिलती है।

चार हजार लोगों के जीवनभर लेने लायक आक्सीजन होगी खत्म

यदि एक पेड़ 100 फीट लंबा और 18 इंच मोटा है तो यह छह हजार पाउंड आक्सीजन प्रतिदिन देता है। इसके अलावा वातावरण में उपस्थति हानिकारक कार्बन डाई आक्साइड को भी शोषण करता है। यदि औसत निकाला जाए तो एक बड़ा पेड़ चार लोगों के जीने के लिए पर्याप्त आक्सीजन देता है। इस प्रकार यदि 947 पेड़ काटे जाते हैं तो अनुमान के मुताबिक चार हजार लोगों के जीवन भर लेने लायक आक्सीजन खत्म हो जाती है।

अभी इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। अधिकारियों से बात करने के बाद ही इसके बारे में बता पाएंगे। यदि पेड़ काटे जा रहे हैं, तो नियमों के तहत ही काटे जा रहे होंगे।

- पवन सिंह, अपर आयुक्त नगर निगम

स्टड फार्म की जमीन पर पेड़ काटने के लिए और इसके क्षतिपूर्ति के लिए आठ महीने पहले आवेदन दिया गया था। मेट्रो कंपनी से क्षतिपूर्ति वाले पेड़ लगाने के लिए राशि मिल गई है। अब इन पेड़ों को लगाने के लिए जगह तलाश की जा रही है।

- एचएस मिश्रा, प्रभारी अनुसंधान एवं विस्तार वन विभाग

नगरीय क्षेत्रों में पेड़ों के संवर्धन और संरक्षण को लेकर विशेष प्रविधान किए गए हैं। इसके तहत यदि नगरीय क्षेत्रों में कोई पेड़ काटा जाता है तो उसके एक अनुपात पांच के बराबर पौधे लगाए जाने चाहिए। पुराने पेड़ काटने से पहले नए पेड़ों को लगाने की कार्य योजना बनानी चाहिए।

- सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद

मेट्रो के डिपो में पूरे इलाके में निर्माण नहीं होता है। यदि छह एकड़ के इलाके में व्यवस्थित नियोजन के अनुसार कार्य किया जाए तो 40 फीसदी पेड़ बचाए जा सकते हैं। लेकिन कम्पनी काम में सुगमता के लिए सभी पेड़ो को काटने पर तुली है। राजधानी में पिछले कुछ दशकों में हरियाली घटते हुए न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। यह न केवल तकनीकी तौर पर गलत है साथ ही पर्यावरण के लिए भी गलत है।

- सुयश कुलश्रेष्ठ, टाउन प्लानर