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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal News: पता था सर्दियों में दम घोंटेगा धूल व धुएं का गुबार, फिर भी शहर में नहीं बढ़ाई वाटर फागर व स्वीपिंग मशीनें

महज चार वाटर फागर व इतनी ही स्वीपिंग मशीनों के भरोसे 3800 किमी धूल वाली सड़कें।

By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sun, 05 Nov 2023 01:03:54 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Nov 2023 01:03:54 PM (IST)
Bhopal News: पता था सर्दियों में दम घोंटेगा धूल व धुएं का गुबार, फिर भी शहर में नहीं बढ़ाई वाटर फागर व स्वीपिंग मशीनें

HighLights

  1. भोपाल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 तक पहुंचा।
  2. शहर की 75 प्रतिशत सड़कें धूल से बेहाल हैं।
  3. जगह-जगह कचरा जलाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में ठंड के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगा है। यह कोई नई बात नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्येक वर्ष प्रदूषण का स्तर ठंड में बढ़ने लगता है। वर्तमान में भी बीते 10 दिन से वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी हो रही है जो 150 से बढ़कर 250 तक पहुंच चुका है। यह स्थिति यही खत्म नहीं होगी, बल्कि जैसे-जैसे हवा प्रदूषित होगी, वैसे-वैसे सूचकांक बढ़ेगा और 300 के ऊपर पहुंच जाएगा। बीते वर्ष यह 350 के पर पहुंच गया था।

न के बराबर संसाधन

यह बात पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राज्य व क्षेत्रीय अधिकारियों से लेकर निगम समेत तमाम एजेंसियों को पता है। तब भी हाल यह है कि शहर में प्रदूषण की जड़ धूल के कणों को नियंत्रित करने वाली वाटर फागर मशीनों की संख्या चार से आगे नहीं बढ़ी है। यही नहीं, सड़कों से धूल उठाने वाली स्वीपिंग मशीनें भी इतनी ही हैं, बल्कि इनमें से दो तो हमेशा खराब ही रहती हैं। केवल एक मशीन रात में एमपी नगर के अलग-अलग क्षेत्रों में चलती हुई दिखती है।


जर्जर सड़कों से उड़ती धूल बिगाड़ रही हालात

बता दें कि शहर में सड़कों की कुल लंबाई 3800 किलोमीटर से अधिक है। इनमें से 75 प्रतिशत सड़कें इस समय धूल से बेहाल है। बाकी की ठीक हैं तो कच्ची सड़कों का तो हिसाब ही नहीं है। ऊपर से 1000 स्थानों पर बड़े-छोटे निर्माण कार्य चल रहे हैं। जहां धूल उड़ती रहती है। इन सड़कों से उड़ने वाली धूल और इनमें पर जमा होने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए निगम के पास इंतजाम ही नहीं है।

माह में 960 घंटे सफाई का दावा, विशेषज्ञों ने नकारा

नगर निगम दावा करता है कि शहर में चार रोड स्वीपिंग मशीनों से एक माह में 960 घंटे सफाई की जाती है। यानी एक मशीन प्रतिदिन रात में आठ घंटे सड़क की सफाई करती है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की 3800 किलोमीटर की सड़क साफ करने के लिए स्वीपिंग मशीनों की संख्या नाकाफी है। यदि चार मशीनें एक साथ चलें तभी भी एक फोरलेन सड़क की सफाई करने में 10 घंटे लगेंगे। ऐसे में शहर की सभी सड़कों से धूल हटाने के लिए दो दर्जन से अधिक मशीनों की आवयश्कता होगी।

हर माह 10 लाख रुपये खर्च, नतीजा सिफर

नगर निगम चार वाटर फागर और चार रोड स्वीपिंग मशीन के संचालन के नाम पर प्रतिदिन 240 लीटर डीजल खर्च करता है। यानी प्रतिदिन करीब 24000 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं इसमें 16 कर्मचारी काम करते हैं। इनके वेतन को भी जोड़ दें, तो प्रतिमाह निगम द्वारा इन मशीनों के संचालन में 10 लाख रुपये की राशि खर्च करता है। फिर वायु गुणवत्ता सूचकांक कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है।

जहां बैठते हैं अधिकारी, वहीं प्रदूषण का स्तर रिकार्ड बना रहा

शाहपुरा में पर्यावरण परिसर है। यहां मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रदेश कार्यालय है। क्षेत्रीय कार्यालय भी यहीं है। जल, वायु, ध्वनि समेत सभी तरह के प्रदूषण की निगरानी यहीं से होती है और विभिन्न तरह की रिपोर्ट बनती है। इसी परिसर में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक आधुनिक स्टेशन है, जिसकी हाल की रिपोर्ट है कि क्षेत्र में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। तब भी नियंत्रण के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर के कोलार, भेल समेत अन्य क्षेत्रों की क्या स्थिति है।

तंदूर-भट्टी पर कार्रवाई, कचरा जलाने वालों को छूट

इधर नगर निगम एनजीटी के निर्देश के बाद होटल व रेस्टारेंट में तंदूर या भट्टी का इस्तेमाल करने पर चालानी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जगह-जगह कचरा जलाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिससे कचरा जलाने वालों के हौसले बुलंद हैं। वहीं बड़ी संख्या में निगम के सफाईकर्मी ही झाड़ू लगाने के बाद कचरा जला देते हैं।

शहर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़कों की सफाई और धूल को कम करने के लिए पानी का छिड़काव जरुरी है, लेकिन वीआइपी सड़कों को छोड़ दें तो अन्य स्थानों पर ये मशीनें दिखती नहीं हैं।

- डीपी पटेल, अवधपुरी

नगर निगम के सफाईकर्मी सड़क पर झाड़ू लगाने के बाद इसके किनारे कचरे को इकठ्ठा कर आग लगा रहे हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी क्षेत्र में निरीक्षण नहीं करते, जिससे इस पर रोक नहीं लग रही है।

- कमल राठी, अरेरा कालोनी

अन्ना नगर के आसपास कई कबाड़ियों की दुकानें हैं, जो बिजली के वायर से तांबा निकालने के लिए बड़ी मात्रा में इसे जलाते हैं। इससे भी प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं निर्माण कार्यों के दौरान लोग हरी नेट भी नहीं लगाते।

- राहुल मालवीय, अवधपुरी

शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिदिन रोड स्वीपिंग मशीनों से सफाई की जा रही है। चार वाटर फागर के साथ वाटर टैंकरों की मदद से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

- योगेंद्र पटेल, उपायुक्त, भोपाल नगर निगम