• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal News: मेरे बोलचाल के लहजे ने हाथों में हाकी स्टिक की जगह माइक थमा दिया : एहसान कुरैशी

जश्न-ए-उर्दू कार्यक्रम में शिरकत करने भोपाल आए मशहूर स्टैंडअप कामेडियन एहसान कुरैशी ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए।

By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sat, 17 Feb 2024 10:28:56 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Feb 2024 10:28:56 AM (IST)
Bhopal News: मेरे बोलचाल के लहजे ने हाथों में हाकी स्टिक की जगह माइक थमा दिया : एहसान कुरैशी
जश्न-ए-उर्दू समारोह में प्रस्तुति देते एहसान कुरैशी।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मुझे बचपन से ही हाकी खेलने का बहुत शौक था। मैं जिमानिस्ट भी था। भोपाल तो वैसे भी हाकी का गढ़ माना जाता था तो कई लेवल पर मैंने हाकी खेली। लेकिन मेरा घुटना टूट गया और गरीबी की वजह से आपरेशन नहीं करवा पाए। दो-तीन महीने का प्लास्टर बंध गया। ऐसे में मेरे बोलचाल के हास्यमिश्रित लहजे ने मेरे हाथों में हाकी स्टिक की जगह माइक थमा दिया। यह कहना था मशहूर स्टैंडअप कामेडियन और शायर एहसान कुरैशी का, जो गौहर महल में चल रहे 'जश्न- ए- उर्दू' समारोह में भाग लेने भोपाल आए थे।

naidunia_image

बताया अपने खास लहजे का रहस्य

इस दौरान नवदुनिया से चर्चा में एहसान ने कहा कि लोगों को पाए की लत होती है, चाय की लत होती है, लेकिन मुझे गर्म पानी की है, गर्म पानी पीते ही दिमाग खुल जाता है। उन्होंने बताया कि बचपन में ही माता-पिता गुजर गए थे और खेती-किसानी के बीच ही मेरा जीवन गुजरा तो गांव में जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर किसी को पुकारते थे तो बहुत ऊंचा खींच कर बोलते थे और वहीं से यह लहजा मेरे जीवन में रच-बस गया। फिर कामेडी करने का मौका मिला तो सभी ने मुझे इसी अंदाज में सुना। इसलिए मैं कहता हूं कि दो लोगों की दुआएं हमेशा लेकर चलनी चाहिए किसानों की और मां की, किसान अन्नदाता है, उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए।


naidunia_image

मेरी रग-रग में बसा है सूफी संगीत : ममता जोशी

जश्ने-उर्दू में सूफी संगीत की महफिल सजाने भोपाल पधारीं मशहूर गायिका ममता जोशी ने कहा कि यदि आप तृष्णा में जीते हैं तो तृष्णा पूरी न होने पर आप दुखी भी बहुत होते हैं। इसलिए मैंने अपने आप से तृष्णा को दूर ही रखा। यह कहना है मशहूर सूफियाना सिंगर ममता जोशी का। नवदुनिया से बातचीत में उन्होंने अपने विचारों और संगीत के पहलुओं पर चर्चा की। ममता ने कहा कि आज के समय में संगीत सुनने वाले आडियंस को भी दर्शकों की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि वह गायक की रूहानियत से रुबरू होने नहीं, बल्कि परफार्मेंस देखने आते हैं। खासकर सूफियाना अंदाज में तो अब ज्यादा परफार्मेंस का चलन है, लोग कहते हैं कि बैठकर सूफी गायन किया जाता है, खड़े होकर नहीं, लेकिन यह किसने देखा है कि अमीर खुसरो या बुल्ले शाह ने बैठकर सूफी गायन किया था या खड़े होकर। मेरा सूफी गायन नेचुरल ही है। मुझे इसके लिए कुछ जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती, जद्दोजहद तो तब करनी पड़ती है जब कोई बोले कि कुछ फोक या पाप सुनाइए। तब लगता है कि भाई अब मुझे कुछ अलग करना है। क्योंकि सूफी तो मेरी रग-रग में बसा है और यह एक जोनर है जिसमें मैं अपने आप ही बह रही हूं।