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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bhopal News: अब भोपाल हाट में भी मिलेंगे केले के रेशों से बने सौख्यम पैड

Bhopal News: पैड वुमेन आफ इंडिया अंजू बिष्ट ने रियूजेबल सैनिटरी नैपकिंस की जानकारी साझा की।

By Sushil PandeyEdited By: Lalit Katariya
Publish Date: Tue, 05 Mar 2024 09:20:19 PM (IST)Updated Date: Tue, 05 Mar 2024 09:20:19 PM (IST)
Bhopal News: अब भोपाल हाट में भी मिलेंगे केले के रेशों से बने सौख्यम पैड

HighLights

  1. अन्य राज्यों तक किफायती एवं सुरक्षित रीयूसेबल पैड्स पंहुच रहे हैं
  2. बुरहानपुर जिले के जयसिंघपुरा एवं खकनार में हो रहा है निर्माण
  3. सौख्यम को राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर पर र पुरस्कृत किया है

Bhopal News: भोपाल। किसी भी महिला के लिए माहवारी के दिन एक समस्या या चुनौती के समान ही होते हैं। ऐसे में यदि उन्हें कोई ऐसा साधन मिल जाए जो उनकी इन दिनों की समस्याओं को कम कर दे तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। कुछ ऐसा ही है माता अमृतानंदमयी मठ का एक नवाचार सौख्यम नामक रियूजेबल पैड, जो अब मध्य प्रदेश की महिलाओं को राहत दे रहा है। खास बात यह है कि इस पैड का उपयोग तीन से चार साल तक बार-बार किया जा सकता है, जिससे धन की भी बचत होती है। अभी तक यह आनलाइन उपलब्ध था, लेकिन आगामी जून माह से भोपाल हाट स्थित अजीविका मार्ट से भी इसकी बिक्री की जाएगी। इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पैड वुमेन आफ इंडिया के नाम से मशहूर अंजू बिस्ट ने महिला दिवस के उपलक्ष्य में अपने प्रोजेक्ट और उत्पाद की जानकारी मीडिया से साझा की।उन्होंने बताया कि सौख्यम रियूजेबल पैड का निर्माण केले के रेशों से किया जाता है।इसके लिए सौख्यम संस्था प्रदेश के ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ मिलकर काम कर रही है। बुरहानपुर जिले के जयसिंघपुरा एवं खकनार में महिलाओं का समूह इसका निर्माण कर रहा है। इनके माध्यम से मप्र के साथ-साथ अन्य राज्यों तक किफायती एवं सुरक्षित रीयूसेबल पैड्स पंहुच रहे हैं।

काफी राहत मिली है- इस मौके पर मौजूद इंदौर की डा सुजाता शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछ्ले दो सालों से वे सौख्यम का इस्तेमाल कर रही हैं। सामान्य सैनिटरी नैपकिंस से उनको कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने मेंस्ट्रुअल कप का भी इस्तेमाल किया पर राहत उनको मिली जब सौख्यम पैड्स इस्तेमाल करना शुरू किया। अब माहवारी के समय न ही पेट में दर्द होता है और न पीठ में। पीरियड्स भी ठीक समय पर हर महीने आ जाते हैं। रशेस और क्रैम्प्स से भी छुटकारा मिल गया है।इस मौके पर मौजूद मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अतिरिक्त सीइओ संजीव सिन्हा ने बताया कि तीन से चार साल तक चलने वाले सौख्यम को राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तरों पर पर पुरस्कृत किया गया है।