Bhopal News: दरक रही दीवारें, गिर रहे छज्जे, घटिया निर्माण का खामियाजा भुगत रहे गरीब रहवासी
नगर निगम ने नौ वर्ष पहले 202 करोड़ रुपये से बनाए थे गरीबों के लिए 14 हजार फ्लैट। रहवासी बोले- नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन नहीं हो रही सुनवाई।
By Ravindra Soni
Edited By: Ravindra Soni
Publish Date: Thu, 28 Mar 2024 08:38:33 AM (IST)
Updated Date: Thu, 28 Mar 2024 08:38:33 AM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत वर्ष 2015-16 में नगर निगम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 14 हजार फ्लैट बनाए थे। इसमें करीब 202 करोड़ रुपए खर्च भी हुए। लेकिन घटिया निर्माण की वजह से नौ वर्ष में ही ये फ्लैट जर्जर हो गए। अब इनकी दीवारें दरकने लगी हैं, छत के छज्जे भी गिर रहे हैं। जिससे इन घरों में रहने वालों को रात में भी नींद नहीं आती है, उन्हें दुर्घटना का डर बना रहता है।
शिकायतों की सुनवाई नहीं
बता दें कि जब ये फ्लैट बनाए गए, उस समय एक फ्लैट की कीमत साढ़े चार लाख रुपये थी। इसमें हितग्राहियों से डेढ़ लाख रुपये वसूले गए थे, बाकी राशि केंद्र, राज्य सरकार और नगर निगम को देना थी। कई गरीब परिवारों ने बैंको से लोन लेकर इन आवासों को खरीदा था। अब घटिया निर्माण की वजह से नौ वर्ष में ही ये इमारतें दरकने लगी हैं। इंदिरा नगर मल्टी में रहने वाले अनिल साहू ने बताया कि यहां एक नहीं कई समस्याएं हैं। सीवेज की लाइनें टूट चुकी हैं। छत, सीढ़ियों और छज्जों का प्लास्टर गिर रहा है। इमारतें जर्जर ही चुकी हैं, कालम के अंदर सरिए दिखने है। रहवासियों का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों से शिकायत भी करते हैं, तो कोई सुनवाई नहीं होती।
मरम्मत कराने से पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
मैनिट चौराहा स्थित राहुल नगर मल्टी में करीब 500 परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले राहुल ने बताया कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। नतीजतन इमारत बनने के एक-दो वर्ष में ही जर्जर होने लगी। घर के अंदर मरम्मत कराने की जिम्मेदारी रहवासी और बाहर की नगर निगम की है, लेकिन निगम अधिकारी कहते हैं, कि इसका कोई प्रविधान नहीं है। मकानों की बाहरी मरम्मत कालोनी समिति को करानी है, लेकिन यहां तो कोई समिति भी नहीं है।
तय मात्रा में नहीं हुआ सीमेंट का इस्तेमाल
अर्जुन नगर में नगर निगम ने 1120 फ्लैट बनाए गए हैं। इसके लिए निगम ने सुप्रीम बिल्डिकान को ठेका दिया। उक्त कंपनी ने निर्माण रिजवान नामक ठेकेदार से कराया। निर्माण के दौरान 2014 में यहां एक ब्लाक की छत गिर गई थी। इसकी जांच तत्कालीन निगम इंजीनियर सुनील श्रीवास्तव ने की थी। इसमें सीमेंट की मात्रा कम पाई गई। इसके बावजूद ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई( वहीं मामूली मरम्मत के बाद फ्लैट हितग्राहियों को सौंप दिए गए।
यहां बने थे फ्लैट
स्थान - संख्या
बाबा नगर - 1872
श्याम नगर - 1440
कल्पना नगर - 212
गंगा-अराधना नगर - 1848
इंद्रा नगर फेस 1 - 1216
इंद्रा नगर फेस 2 - 898
वाजपेयी नगर - 3328
अर्जुन नगर, राहुल नगर - 3528
इनका कहना
जेएनएनयूआरएम के तहत बने मकानों की मरम्मत रहवासी समितियों को करानी होती है। इसके लिए निगम के पास कोई प्रविधान नहीं है।
- हरेंद्र नारायण, आयुक्त, भोपाल नगर निगम