भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। गोविंदपुरा क्षेत्र में भेल दशहरा मैदान पर भेल जनसेवा समिति द्वारा आयोजित भोजपाल महोत्सव मेले की शुरुआत हो चुकी है। इस बार बच्चे मेले में मछलियों का संसार भी देख रहे हैं। बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता, दादा-दादी मछलियों की प्रजातियों के बारे में जान रहे हैं। भोजपाल मेले की शुरुआत सुंदरकांड पाठ के साथ ही 27 नवंबर से की गई थी। मेले में शहरभर से लोगों का आना शुरू हो गया है।
टनल के रूप में लगा मछली घर
मेले में इस बार सर्कस की जगह 90 बाय 200 मीटर का कांच का मछली घर टनल के रूप में लगाया गया है। जिसमें सैकड़ो प्रकार की मछलियां देखने को मिल रही हैं। टनल के अंदर जाकर बच्चे और बड़े मछलियों को नजदीक से देख रहे हैं। मेले के आयोजक विकास वीरानी, सुनील यादव ने बताया कि मेले का उद्देश्य सबका मनोरंजन करना है। युवाओं को रोजगार सहित मंच उपलब्ध कराना है। शनिवार से मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी।
दक्षिण भारतीय शैली में डिजाइन किए द्वार
इस बार भोजपाल मेला का मुख्य द्वारा दक्षिण भारत के मंदिरों की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। मुख्य द्वार 200 फीट लंबा और 35 फीट ऊंचा है। इसके साथ ही इसी मेला परिसर में आकर्षक मंच बनाया गया है। जहां पर हर दिन विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों द्वारा तरह-तरह के नृत्य-गान सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। मेले में प्रापर्टी, आटोमोबाइल, इलेक्टानिक, टेलीकाम, फर्नीचर, हैंडिक्राफ्ट, हैन्डलूम, महासेल, विभिन्न तरह के स्वादिस्ट व्यंजन, बैंकिंग इंश्योरेंस, आर्ट गैलरी, इंटीरियर, महिलाओं की सौंदर्य सामग्री, खूर्जा क्राकरी, कपड़े, आकर्षक एवं मनोरंजक झूले-खेलकूद के स्टाल आदि महोत्सव के आकर्षक रहेगे।
ये झूले कर रहे शहरवासियों को कर रहे आकर्षित
मेले का मुख्य आकर्षण बच्चों एवं बड़ों के लिए अत्याधुनिक रोमांचक झूले हैं। मेले में सबसे बड़ा झूला रोलर कोस्टर, टावर, रेंजर, आक्टोपस, बे्रक डांस, एरोप्लेन, मिनी ट्रेन, पिग्गी ट्रेन, कटर पिलर, फ्रीज व्हील, बड़ी नाव, ड्रेगन, टोरा-टोरा, चांद-तारा, बाउंसी, चाइना बाउंसी, वाटर वोट, जपिंग, चकरी आकर्षक झूला स्विंग ईट, मौत का कुंआ, स्टाइकिंग कार, घोस्ट हाउस और रंग- बिरंगे कई झूले हैं, जो बच्चों का मन लुभाने से नहीं रोक पाएंगे। स्पीड की दुनिया में सबसे तेज भागता झूला ट्विस्टर व्हील सहित कई प्रकार के झूले मेले में आकर्षक का केंद्र हैं।