
बृजेंद्र ऋषीश्वर, नईदुनिया, भोपाल। राजधानी के होटलों में फर्जी पहचान-पत्र का सहारा लेकर छिपने वाले अपराधियों और संदिग्धों पर अब पुलिस का शिकंजा कसने जा रहा है। भोपाल पुलिस कमिश्नरेट एक नया ऑनलाइन वेरिफिकेशन मैकेनिज्म शुरू करने जा रहा है। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होते ही होटल में ठहरने वाले हर अतिथि की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम तक रियल टाइम (तत्काल) पहुंच जाएगी।
यदि कोई व्यक्ति जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करता है तो एआई आधारित सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। इस योजना को शुरुआती चरण में शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र एमपी नगर के होटलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। एमपी नगर में मिली सफलता और होटल संचालकों के फीडबैक के आधार पर इसका विस्तार भोपाल के सभी थाना क्षेत्रों में किया जाएगा।
पुलिस आयुक्त संजय कुमार के अनुसार एक निजी साफ्टवेयर कंपनी के सहयोग से यह कामन डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है, जो अपने अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही आधिकारिक रूप से लांच कर दिया जाएगा।
केस-1: जबलपुर में हत्या की वारदात को अंजाम देकर आया आरोपित आइएसबीटी के पास स्थित एक होटल में फर्जी पहचान-पत्र के सहारे रुका हुआ था। जब तक पुलिस को भनक लगी, आरोपित वहां से फरार हो चुका था।
केस-2: पिपलानी क्षेत्र के एक होटल में फर्जी आइडी और एआइ टूल्स से तैयार नकली पहचान-पत्र के आधार पर एक युवक और दो लड़कियां ठहरी थीं। जांच में इनमें से एक लड़की नाबालिग पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
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इस नई तकनीक से जहां पुलिस को अपराधियों की रियल टाइम ट्रैकिंग और त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी, वहीं होटल संचालक भी जाने-अनजाने में किसी अपराधी या असामाजिक तत्व को पनाह देने से बच सकेंगे। यह पहल भोपाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और राजधानी को अधिक सुरक्षित बनाने में प्रभावी साबित होगी।