सामान्य दिनों में 12 से 15 लाख का भुगतान यूपीआई से होता है। नो-यूपीआई डे के दौरान ग्राहकों ने सहयोग किया और करीब 8 से 10 लाख का लेन-देन नकद व अन्य बैंकिंग माध्यमों से हुआ। - नवनीत अग्रवाल, संगठन मंत्री, भोपाल सराफा महासंघ
चौक बाजार की दुकानों में क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधकर विरोध जताया गया। कपड़ा बाजार में करीब 1 करोड़ का भुगतान आरटीजीएस और नेट बैंकिंग से हुआ। सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले। - अभिषेक जैन, अध्यक्ष, चौक बाजार व्यापारी महासंघ
इस नियम से छोटे दुकानदारों पर हर महीने 1500 से दो हजार और सालाना करीब 25 हजार रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। इससे नकद की मांग बढ़ेगी और डिजिटल इंडिया अभियान प्रभावित होगा। - संजय बलेचा, उपाध्यक्ष, न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ
थोक किराना में 90 प्रतिशत से ज्यादा सौदे दो हजार रुपये से ऊपर के होते हैं। किराना कारोबार में मुनाफा ही महज एक प्रतिशत के आसपास रहता है, ऐसे में 0.4 प्रतिशत चार्ज लगने से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार इस पर पुनर्विचार करे। - विवेक साहू, महामंत्री, भोपाल किराना व्यापारी महासंघ
जिस तरह भारी शुल्कों के चलते एटीएम का उपयोग घटा, ठीक उसी तरह यूपीआई भी चलन से बाहर हो जाएगा। व्यापारियों पर यह अतिरिक्त आर्थिक मार किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। - राकेश अग्रवाल, संयोजक, भोपाल व्यापारी महासंघ
यूपीआई पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भोपाल ने नो-यूपीआई डे मनाते हुए प्रतिष्ठानों पर क्यूआर कोड का सांकेतिक ब्लैकआउट किया।
कैट जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि व्यापारी यूपीआई नहीं बल्कि उस पर थोपी जा रही लागत एमडीआर के खिलाफ हैं। जब व्यापारियों को छूट नहीं मिल रही, तो इसे डिस्काउंट के बजाय मर्चेंट टैक्स रेट कहना चाहिए।
डिजीटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्राविधान न्यायसंगत नहीं है। यदि समाधान नहीं निकला, तो यह 60 सेकंड का ब्लैकआउट आगे 60 दिनों के आंदोलन में बदल सकता है।