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'0.4% MDR मंजूर नहीं, ऑनलाइन पेमेंट बंद': QR Code पर ढंका काला कपड़ा; UPI चार्ज के खिलाफ भोपाल के व्यापारियों का हल्लाबोल

शहर के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर नो-यूपीआई डे मनाया और दुकानों पर लगे क्यूआर कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर सांकेतिक विरोध किया। चौक ब...और पढ़ें

By PANKAJ SHRIVASTAVAEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 06:47:19 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 06:47:19 PM (IST)
'0.4% MDR मंजूर नहीं, ऑनलाइन पेमेंट बंद': QR Code पर ढंका काला कपड़ा; UPI चार्ज के खिलाफ भोपाल के व्यापारियों का हल्लाबोल
नो-यूपीआई डे मनाया और दुकानों पर लगे क्यूआर कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर सांकेतिक विरोध किया। नईदुनिया।

HighLights

  1. भोपाल के प्रमुख बाजारों में मनाया गया नो-यूपीआई डे
  2. व्यापारियों ने क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधा
  3. ग्राहकों से नकद, आरटीजीएस और नेट बैंकिंग से भुगतान कराया

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । राजधानी के प्रमुख बाजारों में बुधवार को डिजीटल लेन-देन आम दिनों की तुलना में काफी कम रहा। दुकानों पर पहुंचे खरीदार जब यूपीआई से भुगतान करने लगे, तो व्यापारियों ने उनसे यूपीआई के बजाय नकद, आईएमपीएस या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान करने का आग्रह किया।

व्यापारी हुए लामबंद

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले के विरोध में भोपाल के व्यापारी लामबंद हुए।

शहर के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर नो-यूपीआई डे मनाया और दुकानों पर लगे क्यूआर कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर सांकेतिक विरोध किया। चौक बाजार में व्यापारियों ने यूपीआई का प्रतीकात्मक पुतला बनाकर ऑनलाइन, नो लाइन के नारे लगाए प्रदर्शन किया।


नकद पेमेंट कराया

न्यू मार्केट, चौक बाजार, 10 नंबर और बैरागढ़ जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानदारों ने ग्राहकों को वैकल्पिक पेमेंट माध्यमों के लिए प्रेरित किया। सराफा, कपड़ा और थोक किराना कारोबारियों ने नकद, नेट बैंकिंग और अन्य माध्यमों से लेन-देन कराया।

भोपाल सराफा महासंघ के अनुसार सामान्य दिनों में जहां यूपीआई से 12 से 15 लाख रुपये का लेन-देन होता था, वहीं बुधवार को ग्राहकों ने वैकल्पिक माध्यमों से करीब 8 से 10 लाख रुपये का कारोबार किया। वहीं थोक कपड़ा बाजार में लगभग 1 करोड़ रुपये का भुगतान आरटीजीएस और नेट बैंकिंग के जरिए निपटाया गया।

भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने सरकार से एमडीआर व्यवस्था तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के लिए पूर्ववत जीरो-एमडीआर व्यवस्था बहाल रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने एनपीसीआई, बैंकों और व्यापारिक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाकर समाधान निकालने की अपील की।

यह भी पढ़ें- नो यूपीआई डे : इंदौर में क्यूआर कोड पर काला कपड़ा ढंककर एमडीआर के विरोध में उतरे व्यापारी

क्या कहते हैं व्यापारी प्रतिनिधि

सामान्य दिनों में 12 से 15 लाख का भुगतान यूपीआई से होता है। नो-यूपीआई डे के दौरान ग्राहकों ने सहयोग किया और करीब 8 से 10 लाख का लेन-देन नकद व अन्य बैंकिंग माध्यमों से हुआ। - नवनीत अग्रवाल, संगठन मंत्री, भोपाल सराफा महासंघ

चौक बाजार की दुकानों में क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधकर विरोध जताया गया। कपड़ा बाजार में करीब 1 करोड़ का भुगतान आरटीजीएस और नेट बैंकिंग से हुआ। सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले। - अभिषेक जैन, अध्यक्ष, चौक बाजार व्यापारी महासंघ

इस नियम से छोटे दुकानदारों पर हर महीने 1500 से दो हजार और सालाना करीब 25 हजार रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। इससे नकद की मांग बढ़ेगी और डिजिटल इंडिया अभियान प्रभावित होगा। - संजय बलेचा, उपाध्यक्ष, न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ

थोक किराना में 90 प्रतिशत से ज्यादा सौदे दो हजार रुपये से ऊपर के होते हैं। किराना कारोबार में मुनाफा ही महज एक प्रतिशत के आसपास रहता है, ऐसे में 0.4 प्रतिशत चार्ज लगने से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार इस पर पुनर्विचार करे। - विवेक साहू, महामंत्री, भोपाल किराना व्यापारी महासंघ

जिस तरह भारी शुल्कों के चलते एटीएम का उपयोग घटा, ठीक उसी तरह यूपीआई भी चलन से बाहर हो जाएगा। व्यापारियों पर यह अतिरिक्त आर्थिक मार किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। - राकेश अग्रवाल, संयोजक, भोपाल व्यापारी महासंघ

कैट ने किया 60 सेकंड का सांकेतिक प्रदर्शन

यूपीआई पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भोपाल ने नो-यूपीआई डे मनाते हुए प्रतिष्ठानों पर क्यूआर कोड का सांकेतिक ब्लैकआउट किया।

कैट जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि व्यापारी यूपीआई नहीं बल्कि उस पर थोपी जा रही लागत एमडीआर के खिलाफ हैं। जब व्यापारियों को छूट नहीं मिल रही, तो इसे डिस्काउंट के बजाय मर्चेंट टैक्स रेट कहना चाहिए।

डिजीटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्राविधान न्यायसंगत नहीं है। यदि समाधान नहीं निकला, तो यह 60 सेकंड का ब्लैकआउट आगे 60 दिनों के आंदोलन में बदल सकता है।