भोपाल में बड़े तालाब के बाद अब शाहपुरा झील का होगा सीमांकन; NGT का सख्त रुख, एक सप्ताह में मलबा हटाने के निर्देश
नगर निगम, कलेक्टर और एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीमांकन, अतिक्रमण और बफर जोन उल्लंघन पर विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी में पेश करनी होगी।
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 12:02:09 PM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2026 12:02:09 PM (IST)
शाहपुरा तालाब, भोपाल। नईदुनिया।HighLights
- शाहपुरा तालाब और 50 मीटर बफर जोन का सीमांकन होगा
- अतिक्रमण चिह्नित कर एक सप्ताह में मलबा हटाने के निर्देश
- निगम, कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रस्तुत करेंगे वर्क रिर्पोट
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शाहपुरा तालाब और उसके बफर जोन का सीमांकन कर अतिक्रमण चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शाहपुरा तालाब किनारे डाला गया डीसिल्टिंग का मलबा एक सप्ताह में हटाने को कहा है।
नगर निगम, कलेक्टर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को इस कार्रवाई की रिपोर्ट तीन सप्ताह में एनजीटी के समक्ष पेश करनी होगी।
नईदुनिया ने उठाया था मुद्दा
दरअसल, नईदुनिया में 18 जुलाई को 'साजिश की भेंट चढ़ रहा शाहपुरा तालाब, स्टाप डैम तोड़कर बहाया जा रहा पानी' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया है।
इस स्वत: संज्ञान याचिका के साथ नितिन सक्सेना द्वारा दायर मूल आवेदन पर एनजीटी ने संयुक्त सुनवाई करते हुए शाहपुरा तालाब पर अतिक्रमण, जल गुणवत्ता सुधार के लिए डीसिल्टिंग, बिना शोधन के गंदे पानी के प्रवाह तथा बफर जोन में निर्माण को प्रमुख मुद्दा माना।
तालाब में पहुंचे साफ पानी
एनजीटी ने नगर निगम, कलेक्टर और एमपीपीसीबी को निर्देश दिए कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर तालाब और 50 मीटर बफर जोन का सटीक सीमांकन कर अतिक्रमणों की पहचान की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जलाशय में नया अतिक्रमण या अवैध निर्माण न हो, नियमित डीसिल्टिंग होती रहे और बिना शोधन का पानी तालाब में नहीं पहुंचे।
सुनवाई के दौरान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान सीमांकन से शाहपुरा तालाब की पूरी सीमा स्पष्ट नहीं हो रही है। इसलिए जीआइएस और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सटीक सीमांकन आवश्यक है। तालाब किनारे पड़ा डीसिल्टिंग का मलबा मानसून में पानी के साथ मिलकर प्रदूषण फैला सकता है, जिसे तत्काल हटाया जाए। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।