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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भोपाल के युवा राहुल पाराशर ने बनाई 'वोकैबमेट्री", मिला पेटेंट

इंग्लिश के शब्दों को आसानी से याद करने की रोचक प्रक्रिया है 'वोकैबमेट्री

By Lalit KatariyaEdited By: Lalit Katariya
Publish Date: Sun, 03 Apr 2022 09:04:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 03 Apr 2022 09:04:56 PM (IST)
भोपाल के युवा राहुल पाराशर ने बनाई 'वोकैबमेट्री", मिला पेटेंट

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। शहर के युवा राहुल पाराशर को अंग्रेजी सीखने की एक अनूठी और आसान प्रक्रिया 'वोकैबमेट्री" लिए पेटेंट प्राप्त हुआ है। राहुल पाराशर ने 2014 में पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार को आवेदन किया था और 30 मार्च 2022 को उन्हें इसका प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। पेटेंट अधिनियम 1970 के तहत 20 वर्ष के लिए उन्हें पेटेंट प्राप्त हुआ है। 'मेथड आफ वोकैबमेट्री" मूल रूप से इंग्लिश सीखने की आसान प्रक्रिया है। हर शब्द से एक कार्टून कैरेक्टर को जोड़ते हुए इसे कामिक्स की तरह बनाया गया है।

राहुल पाराशर ने बताया कि 'वोकैबमेट्री", वोकैबुलरी को आसानी से याद करने का तरीका है। अब तक लगभग 30 हजार विद्यार्थियों ने इससे लाभ प्राप्त किया है। यूपीएससी, क्लैट और कैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए वोकैबमेट्री का पैटर्न उपयोगी साबित हुआ है। अंग्रेजी के शब्द को याद करने के लिए इससे पहले कोई आधारभूत प्रक्रिया नहीं थी, राहुल ने इस समस्या के समाधान पर काम किया और अब इस आसान प्रक्रिया को शिक्षा प्रणाली में जमीनी स्तर पर भी फैलाना चाहते हैं। उनका मानना है कि वर्तमान शिक्षा परिवेश में कोई व्यक्ति अंग्रेजी भाषा से शायद ही बच सकता है। इसलिए पाठ्यक्रम में वोकैबुलरी को शामिल करने के लिए कई स्कूलों के साथ बात की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह सरकारी स्कूलों के लिए तो बहुत उपयोगी है।


खुद के अनुभव से मिली प्रेरणा: राहुल ने बताया कि किसी भी पुस्तक याडिक्शनरी को रटना एक असंभव कोशिश रही है। सीए की पढ़ाई के दौरान मुझे भी इस समस्या का समाना परना पड़ा, लेकिन अगर शब्द आपको कहानियां सुनाएं तो वे हमेशा के लिए याद हो जाएंगे। एक दिन अकेले अपने कमरे में पेन और कागज लिए बैठा था अपनी डिक्शनरी के शुरू के कुछ पन्न्े खोले और जो शब्द देखे उन्हें संक्षेप में लिख दिया। फिर 'एबी" से शुरू होने वाले कई शब्दों की एक सूची बनाई, जिसमें आब्जेक्ट, आब्रिज्ड, एबडिकेट आदि शामिल हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मैंने महसूस किया कि एबी का उच्चारण एब के साथ है और इस कामन काम्बिनेशन को स्टार्ट कोआर्डिनेट का नाम दिया। हर स्टार्ट कोआर्डिनेट के लिए कुछ कैरेक्टर विकसित किए, जिसने शब्दों को एक चरित्र दिया। मैंने महसूस किया कि समान सबसे स्टार्ट और एंड काम्बिनेशन वाले शब्दों को वर्गीकृत करके उनके साथ हास्य पात्रों को जोड़ दें, तो शब्द हमेशा याद रह सकते हैं।

इस प्रकार राहुल ने एक पद्धति विकसित की, जिसमें सबसे स्टार्ट काम्बिनेशन को स्टार्ट कोआर्डिनेट नाम दिया और इसी तरह एंड काम्बिनेशन को एंड कोआर्डिनेट। राहुल ने इन विकसित काम्बिनेशन और 110 यादगार कैरेक्टर की मदद से लगभग छह हजार शब्दों की वोकैबुलरी बनाई है, जिसके चार अंक निकल चुके हैं। उनका लक्ष्य 27 हजार पांच सौ शब्दों की वोकैबुलरी तैयार करना है।