
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान को लेकर प्रदेश के कई जिलों में नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। राजधानी में ही कई अस्पतालों द्वारा सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट मिला दिया जाता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इसे पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। सभी से छह सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में जितेश कुमार सिरोइया द्वारा दायर की गई याचिका में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016, कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के संशोधित दिशा-निर्देश-2016 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2025 के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। इसी आधार पर एनजीटी अधिनियम की धारा 14, 15 और 20 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
इस पर न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई 12 जनवरी 2027 को होगी।
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