कान्हा की तर्ज पर MP के 8 टाइगर रिजर्व में भी बनेंगे बफर जोन, सुरक्षा के साथ बढ़ेगा टूरिज्म
कान्हा टाइगर रिजर्व को छोड़कर प्रदेश के अन्य आठ टाइगर रिजर्व में बफर वनमंडल गठित करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है। इसके लिए अलग से डीएफओ की पदस्थापना की जाएगी।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 12:54:00 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 12:54:00 PM (IST)
प्रदेश में वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन के लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बफर वनमंडल गठित किया जाएगा। फाइल फोटो।HighLights
- मध्य प्रदेश के आठ टाइगर रिजर्व में बनेगा बफर वनमंडल
- वन्यजीव सुरक्षा, निगरानी और प्रबंधन में समन्वय मजबूत होगा
- कान्हा की तर्ज पर बफर जोन में इको टूरिज्म और सफारी को भी बढ़ावा
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन के लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बफर वनमंडल गठित किया जाएगा। अभी केवल कान्हा टाइगर रिजर्व में बफर वनमंडल गठित है। प्रदेश के अन्य आठ टाइगर रिजर्व में इसके गठन की प्रक्रिया चल रही है।
इसको लेकर वन बल प्रमुख रहते वीएन अम्बाड़े ने इसी वर्ष जनवरी में प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को पत्र लिखा था, तब से गठन की प्रक्रिया लंबित रही। अब एक बार फिर इसको लेकर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें अलग से डीएफओ पदस्थ किया जाएगा।
प्रबंधन में होगी आसानी
इसका मुख्य उद्देश्य कोर क्षेत्र के आस-पास के गांवों, राजस्व भूमि और जंगलों में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के विकास व पर्यटन को सुचारू रूप से संचालित करना है। कान्हा को छोड़कर वर्तमान में अन्य आठ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के जंगल अलग-अलग क्षेत्रीय सामान्य वनमंडलों के अधीन बिखरे हुए हैं।
बफर वनमंडल के गठन के बाद, पूरा क्षेत्र सीधे टाइगर रिजर्व के बफर के डीएफओ के एकीकृत प्रबंधन के अधीन होगा। इससे कोर और बफर क्षेत्रों में सुरक्षा और समन्वय मजबूत होगा।
ग्रासलैंड विकसित किए जाएंगे
यह संवेदनशील मुख्य क्षेत्र को बाहरी इंसानी गतिविधियों और रिहायशी दबाव से बचाने के लिए एक प्रोटेक्टिव लेयर (सुरक्षात्मक परत) का काम करेगा। बफर वनमंडल में वन्यजीवों के लिए घास के मैदान (ग्रासलैंड) विकसित किए जाएंगे और कृत्रिम व प्राकृतिक पानी के स्रोत बनाए जाएंगे, ताकि शाकाहारी वन्यजीव और बाघ कोर एरिया से बाहर रिहायशी क्षेत्रों की तरफ न जाएं।
अनूठी इको-टूरिज्म सफारी के लिए प्रसिद्ध कान्हा
कान्हा टाइगर रिजर्व का बफर वनमंडल अपनी अनूठी इको-टूरिज्म सफारी के लिए प्रसिद्ध है। मानसून के समय जब मुख्य कोर एरिया बंद रहता है, तब भी बफर जोन की सफारी पर्यटकों के लिए खुली रहती है।
वन्यप्राणी प्रबंधन की समस्याएं व चुनौतियां बढ़ रही हैं। कोर का एक ही डीएफओ होता है, जिससे बेहतर प्रबंधन नहीं हो पाता है। इसलिए कान्हा की तर्ज पर बफर वनमंडल का गठन कर अलग से डीएफओ की पदस्थापना करने की आवश्यकता है। इसको लेकर मैंने वन मुख्यालय में रहते मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को पत्र भी लिखा था। - वीएन अम्बाड़े, मप्र के सेवानिवृत्त वन बल प्रमुख।