'कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर चेताया था, सप्लाई ठीक करने एमपी सरकार ने 906 करोड़ का लोन लिया'
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दूषित पानी से हुई लोगों की मौत पर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 03 Jan 2026 01:14:37 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Jan 2026 01:42:37 PM (IST)
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार। - फाइल फोटोHighLights
- इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में सिर्फ पांच जोनों में रोजाना पानी पहुंचता है
- दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से सिर्फ 5.30 लाख को नल कनेक्शन मिले हैं
- पानी के रिसाव रोकने कि शिकायत पर नगर निगम 22 से 182 दिन लगाता है
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर में दूषित पानी से मौत को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्हें सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि इंदौर में गंदा पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।
जबकि इंदौर और भोपाल में सप्लाई किए जा रहे गंदे और दूषित पानी की बात कैग ने 2019 में ही कही थी। और उसे ठीक करने के सुझाव भी दिए थे। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से चार बड़े शहरों: भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर, में पानी के प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (तब 906.4 करोड़ रुपये) का कर्ज 25 साल के लिए लिया था। यह पैसा शहरों में पानी की आपूर्ति को बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए था। प्रोजेक्ट के अनुसार हर किसी को पर्याप्त और साफ पानी मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था।
कर्ज लेने के लगभग 15 साल बाद भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2019 में भोपाल और इंदौर के पानी प्रबंधन पर रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में दोनों शहरों में गंभीर कमियां बताई और भ्रष्टाचार उजागर किया। प्रोजेक्ट का काम अपर्याप्त पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कैग की रिपोर्ट ने भोपाल और इंदौर के पानी प्रबंधन पर सवाल उठाए
- इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में सिर्फ पांच जोनों में रोजाना पानी पहुंचता है।
- दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से सिर्फ 5.30 लाख को नल कनेक्शन मिले हैं।
- रिसाव रोकने कि शिकायत पर नगर निगम 22 से 182 दिन लगाता है।
- 2013 से 2018 के बीच 4,481 पानी के नमूने (भौतिक, रासायनिक और जीवाणु परीक्षण वाले) पीने लायक नहीं पाए गए। रिकॉर्ड से पता नहीं चला कि नगर निगम ने क्या कार्रवाई की।
- स्वतंत्र जांच में 54 नमूनों में से 10 खराब पाए गए, उनमें गंदगी और मल कोलिफॉर्म था। इससे भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख यानी कुल 8.95 लाख लोगों को गंदा पानी मिला।
- स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले बताए।
- गैर-राजस्व पानी 30 से 70 प्रतिशत तक है। कोई नहीं जानता कि यह पानी कहां जा रहा है। पानी का नियमित ऑडिट न होने पर बर्बादी कैसे पता चलेगी?
- पानी का टैरिफ कि वसूली नहीं हो रही। दोनों शहरों में 470 करोड़ रुपये के बकाया हैं।
- भोपाल में 9-20 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (एलपीसीडी) और इंदौर में 36-62 एलपीसीडी पानी मिल रहा है।
- ओवरहेड टैंक नियमित साफ नहीं किए जा रहे।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि यह वह गंभीर सवाल है जो कैग ने भोपाल और इंदौर के जल आपूर्ति पर उठाए थे। मगर सरकार तो बिना त्रासदी के जागती ही नहीं है।