MP में MBBS बांड आवंटन में धांधली; पहली रैंक वाली छात्रा पहुंची 2550वें नंबर पर, मामला हाई कोर्ट पहुंचा
एमबीबीएस 2020 बैच के ग्रामीण सेवा बांड आवंटन में बिना दस्तावेज सत्यापन मेरिट सूची तैयार करने का आरोप है। आवेदन में मार्कशीट से अधिक अंक भरने के मामले ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 08:54:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 08:54:09 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो।HighLights
- MBBS की मेरिट सूची में अंकों की गड़बड़ी का आरोप
- पहली रैंक से 2550वें स्थान तक पहुंची छात्रा
- 3500 से अधिक डॉक्टरों का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत एमबीबीएस 2020 बैच की ग्रामीण सेवा बान्ड आवंटन प्रक्रिया में फर्जीवाड़े और भारी लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस वर्ष प्रदेशभर से एमबीबीएस 2020 बैच के करीब साढ़े तीन हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने ग्रामीण सेवा बान्ड के लिए आवेदन किया था।
आरोप है कि बिना दस्तावेजों और मार्कशीट का सत्यापन किए ही जल्दबाजी में मेरिट सूची तैयार कर दी गई, जिससे मेधावी और योग्य डॉक्टरों का हक मारा जा रहा है। इस धांधली के खिलाफ अब पीड़ित छात्र जबलपुर उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) की शरण में पहुंच गए हैं।
फर्जी अंकों का खुलासा
प्रक्रिया में बरती गई घोर लापरवाही का आलम यह रहा कि कई अभ्यर्थियों ने आवेदन में अपनी मूल मार्कशीट से काफी अधिक अंक भर दिए। फर्जीवाड़े का सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब प्रदेश में पहली रैंक हासिल करने वाली एक छात्रा के दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच में खुलासा हुआ कि छात्रा ने आवेदन फार्म में फर्जी और बढ़ाकर अंक दर्ज किए थे। जब उसकी वास्तविक मार्कशीट से अंकों का मिलान किया गया, तो प्रदेश में पहला स्थान पाने वाली वही छात्रा सीधे खिसककर 2550वें स्थान पर आ गिरी। इस घटना ने पूरे बान्ड आवंटन और सत्यापन प्रक्रिया की पोल खोलकर रख दी है।
हाई कोर्ट में याचिका दायर
बिना सत्यापन के प्रक्रिया आगे बढ़ाने से मेधावी छात्रों की मेरिट प्रभावित हुई है। इस नाइंसाफी को देखते हुए अधिवक्ता पंकज पांचाल और अधिवक्ता मुस्कान अली ने प्रभावित विद्यार्थियों के पक्ष में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट याचिका दायर की है।
अधिवक्ता पंकज पांचाल ने बताया कि याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि बान्ड प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए और आवेदन करने वाले सभी 3500 से अधिक छात्रों के मूल दस्तावेजों का निष्पक्षता से पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाए।
किसी भी हाल में योग्य छात्रों के अधिकारों और मेरिट से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर आवश्यक कानूनी कदम उठाया जाएगा।
ग्रामीण सेवा बांड में कथित अनियमितता को लेकर संबंधित कॉलेज के डीन से जानकारी मंगाई गई है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की जाएगी। - डॉ. हेमेंद्र सिंह कदम, उप संचालक विज्ञप्त, संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा