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भोपाल के बिजनेसमैन ने डेढ़ साल पहले होटल में स्वाइप किया कार्ड, अब इंग्लैंड में उड़ गए 3.94 लाख रुपये

भोपाल के उद्योगपति हरीप्रकाश के क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग कर इंग्लैंड के ताज होटल में 3.94 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया गया। पुलिस ने साइबर ठगी का म...और पढ़ें

By prashant vyasEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 08:20:10 AM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 08:20:10 AM (IST)
भोपाल के बिजनेसमैन ने डेढ़ साल पहले होटल में स्वाइप किया कार्ड, अब इंग्लैंड में उड़ गए 3.94 लाख रुपये
भोपाल के बिजनेसमैन के कार्ड से इंग्लैंड में उड़ गए 3.94 लाख रुपये

HighLights

  1. क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग से इंग्लैंड में 3.94 लाख रुपये कटे।
  2. डेढ़ साल पुराने होटल भुगतान के बाद सामने आई ठगी।
  3. बैंक से जवाब नहीं मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल की ओमेगा रिंक बीयरिंग कंपनी के महाप्रबंधक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हरीप्रकाश साइबर ठगी के एक अनोखे मामले का शिकार हुए हैं। उनके क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग कर इंग्लैंड स्थित ताज होटल में 3 लाख 94 हजार 679 रुपये का भुगतान कर दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि हरीप्रकाश ने करीब डेढ़ वर्ष पहले इसी होटल में ठहरने के दौरान कार्ड स्वैप कर भुगतान किया था। पिछले दिनों कंपनी के आडिट के दौरान जब क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन का मिलान नहीं हुआ, तब इस भुगतान के जरिए की गई ठगी का खुलासा हुआ। बैंक से एक माह तक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने पिपलानी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


बैंक से बोले उद्योगपति- न ओटीपी, न लिंक कैसे कटी रकम

  • पिपलानी थाना पुलिस के अनुसार कंपनी के नियमित आडिट के दौरान लेखा विभाग ने बैंक स्टेटमेंट में विदेशी ट्रांजेक्शन दर्ज पाया। जांच में सामने आया कि यह राशि इंग्लैंड स्थित उसी ताज होटल के खाते में गई है, जहां हरीप्रकाश कारोबारी यात्रा के दौरान रुके थे। रिकार्ड खंगालने पर उन्होंने पुष्टि की कि हाल के समय में उन्होंने ऐसा कोई भुगतान नहीं किया है और न ही उन्होंने विदेश में अपने कार्ड का उपयोग किया।
  • मामले की जानकारी मिलते ही हरीप्रकाश ने सबसे पहले आईसीआईसीआई बैंक से संपर्क कर ट्रांजेक्शन पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि न तो कोई ओटीपी और न ही लिंक आया, फिर रकम कैसे गई। करीब एक महीने तक बैंक से लगातार पत्राचार करने के बावजूद उन्हें न तो राशि वापस मिली और न ही स्पष्ट जवाब मिला। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

पुलिस मुख्यालय इंग्लैंड से मांग रही जानकारी

  • प्रारंभिक जांच में पुलिस कार्ड क्लोनिंग की आशंका मान रही है। इंग्लैंड यात्रा के दौरान होटल में कार्ड स्वैप करते समय कार्ड का डेटा कापी कर लिया गया और बाद में उसी जानकारी का उपयोग कर यह ट्रांजेक्शन किया गया। पुलिस बैंक से ट्रांजेक्शन का तकनीकी विवरण और आथेंटिकेशन रिकार्ड मांग रही है।
  • पुलिस मुख्यालय के माध्यम से इंग्लैंड स्थित होटल से भी भुगतान संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्ड डेटा किस स्तर पर लीक हुआ और इस साइबर ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

पेमेंट के बाद कार्ड क्लोनिंग से ऐसे करें बचाव

  • केवल अधिकृत पीओएस मशीन पर ही कार्ड स्वाइप या टैप करें।
  • अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन की सुविधा जरूरत होने पर ही चालू रखें।
  • हर ट्रांजेक्शन के लिए एसएमएस और ई-मेल अलर्ट सक्रिय रखें।
  • बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट कार्ड का विवरण नियमित रूप से जांचते रहें।
  • किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत कार्ड ब्लाक कर बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

भोपाल में ऐसे कई केस साइबर ठगी में ही दर्ज, जांच ही नहीं होती

  • भोपाल में हर महीने ऐसे कई केस सामने आते हैं, जिसमें पीड़ित कि शिकायत होती है कि उनके पास न कोई ओटीपी भेजा जाता है और न ही वे किसी लिंक पर क्लिक करते हैं और न ही कोई एपीके फाइल भेजी जाती है, जिससे कि मोबाइल हैक कर ठगी की जाए।
  • इसके बावजूद उनके कार्ड से पेमेंट होती है। अधिकांश मामलों में बैंक खाते होल्ड कराने और शुरुआती तकनीकी जांच के बाद विवेचना बंद हो जाती है। चूंकि मामला इस बार एक उद्योगपति से जुड़ा है। यही वजह है कि पुलिस ने भी जांच में विशेष रुचि दिखाई है।

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