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मध्य प्रदेश में बनेंगी बिना सीमेंट वाली कंक्रीट की सड़कें, जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा DMIC

विभागीय अधिकारियों को सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 11:56:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 07:30:11 AM (IST)
मध्य प्रदेश में बनेंगी बिना सीमेंट वाली कंक्रीट की सड़कें, जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा DMIC
मध्य प्रदेश में बनेंगी बिना सीमेंट वाली कंक्रीट की सड़कें (AI Image)

HighLights

  1. बिना सीमेंट की कांक्रीट सड़कों के लिए एम्प्री से होगा एमओयू
  2. विजन 2047 के तहत ₹1.05 लाख करोड़ से बनेगा रोड नेटवर्क
  3. जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा DMIC

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में बिना सीमेंट वाली कांक्रीट की सड़कें बनाने के लिए राज्य सरकार सीएसआइआर-एम्प्री के साथ एमओयू करेगी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को एम्प्री भोपाल का भ्रमण कर आधुनिक तकनीकों एवं नवीन निर्माण सामग्रियों को देखा और उनकी उपयोगिता एवं विशेषताओं की जानकारी ली।

विभागीय अधिकारियों को सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर इन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के निर्देश दिए।

मंत्री राकेश सिंह ने जिओपालीमर कांक्रीट की तकनीक को विशेष रूप से समझा। इससे बनी सड़क में तराई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी बचता है। साथ ही, कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस तकनीक का उपयोग एम्स भोपाल में किया जा चुका है। राकेश सिंह ने इस तकनीक को प्रदेश की सड़क परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।


उन्होंने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लाक, कर्ब स्टोन एवं ड्रेनेज ब्लाक जैसे प्रीकास्ट कंपोनेंट्स का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने बताया कि एम्प्री द्वारा लगभग 16 वर्ष पूर्व लगाए गए पेवर ब्लाक आज भी मजबूत स्थिति में हैं, उन पर काई तक नहीं लगी। आगामी इंजीनियर्स डे पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एम्प्री के साथ एमओयू की योजना है।

नए ग्रीनफील्ड कारिडोर और फोरलेन मार्ग देंगे कनेक्टिविटी को गति

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि नए ग्रीनफील्ड कारिडोर, फोरलेन मार्ग और रिंग रोड के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शहरों को देश के बड़े आर्थिक, औद्योगिक और धार्मिक केंद्रों से जोड़ा जा रहा है। विजन 2047 के अंतर्गत 1.05 लाख करोड़ रुपये से रोड नेटवर्क तैयार करने की योजना है। वाराणसी-विशाखापट्टनम कारिडोर के प्रथम चरण में वाराणसी से नागपुर तक कनेक्टिविटी विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में जबलपुर-रीवा से लेकर उत्तर प्रदेश सीमा तक और दक्षिण में नागपुर तक मार्ग का निर्माण किया जाएगा।

मंत्री बुधवार को मंत्रालय में सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। प्रस्तावित अशोकनगर-सागर-जबलपुर-नागपुर फोरलेन मार्ग एवं सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कारिडोर के माध्यम से मध्य प्रदेश की राजस्थान और गुजरात की दिशा में कनेक्टिविटी मजबूत होगी। सागर-कोटा कारिडोर एनएचएआइ की कार्ययोजना में शामिल है।

जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा DMIC

प्रदेश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कारिडोर की योजना भी महत्वपूर्ण है। जबलपुर से भोपाल तक का मार्ग एमपीआरडीसी एवं भोपाल से इंदौर तक का मार्ग एनएचएआइ द्वारा विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके पूर्ण होने से इंदौर-उज्जैन के माध्यम से दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कारिडोर डीएमआइसी तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

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इसी क्रम में खंडवा (आशापुर)-नर्मदापुरम-जबलपुर-रीवा/सतना कारिडोर की तैयारी भी की जा रही है। यह मार्ग पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की दिशा में कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा।