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भोपाल में 3500 टैक्सियों की हड़ताल से हाहाकार, ऐप पर 5 गुना तक बढ़ा किराया, ऑटो चालकों ने की मनमानी वसूली

भोपाल टैक्सी चालक संघ और टैक्सी यूनियन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल के कारण शहर में लगभग 3500 चार पहिया टैक्सियों के पहिए थम गए।

By mukesh vishwakarmaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 10:39:49 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 07:19:12 AM (IST)
भोपाल में 3500 टैक्सियों की हड़ताल से हाहाकार, ऐप पर 5 गुना तक बढ़ा किराया, ऑटो चालकों ने की मनमानी वसूली
एयरपोर्ट और स्टेशन जाने वाले यात्री हुए काफी परेशान।

HighLights

  1. एयरपोर्ट और स्टेशन जाने वाले यात्री हुए काफी परेशान
  2. बुधवार को बोर्ड ऑफिस पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
  3. प्राइवेट गाड़ियों के कमर्शियल यूज़ पर रोक की मांग

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी में मंगलवार को कैब चालकों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। भोपाल टैक्सी चालक संघ और टैक्सी यूनियन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल के कारण शहर में लगभग 3500 चार पहिया टैक्सियों के पहिए थम गए।

सुबह से ही कैब चालकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिसके चलते रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। उधर, संघ ने बुधवार को एक बार फिर बोर्ड ऑफिस चौराहा पर उग्र प्रदर्शन करने की घोषणा कर दी है।

थमे टैक्सियों के पहिए, ऑटो वालों ने की खूब मनमानी

वहीं, टैक्सी चालकों की हड़ताल को देखते हुए ओला, उबर और रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के ऑनलाइन एप पर किराया चार से पांच गुना तक बढ़ा मिला। ऐसा सर्ज प्राइसिंग (एक ऐसी मूल्य निर्धारण रणनीति, जिसमें किसी उत्पाद या सेवा की मांग अचानक बढ़ने और आपूर्ति सीमित होने पर उसकी कीमतें अस्थायी रूप से बढ़ा दी जाती हैं) के कारण हुआ।

यानी इंद्रपुरी से राजा भोज एयरपोर्ट का सामान्य किराया जो 330 रुपये होता था, एप पर बढ़कर 1100 रुपये तक दर्शाने लगा। हालांकि दरें बढ़ने के बाद भी चालकों ने ऑनलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं की। हालांकि एप पर किराए में यह बढ़ोतरी केवल चार पहिया वाहनों पर ही लागू हुई, जबकि आटो और बाइक टैक्सियों का किराया सामान्य ही रहा।

ऑटो चालकों ने वसूला मनमाना किराया

हड़ताल को प्रभावी बनाने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन, भानपुर, एयरपोर्ट, आरटीओ, टीटी नगर और मिसरोद सहित शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर टैक्सी चालक संगठन के प्रतिनिधि मुस्तैद रहे। इस दौरान यूनियन के सदस्य कैब रोकते नजर आए। वहीं एक गुट भोपाल आरटीओ पर प्रदर्शन करता दिखा। इसके बाद आरटीओ भोपाल के साथ उनकी बैठक भी हुई।

इस कारण सुबह रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को कैब सुविधा नहीं मिल सकी। मजबूरी में यात्रियों को आटो का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि चालकों की हड़ताल का फायदा उठाते हुए आटो चालकों ने डेढ़ से दोगुना तक अधिक किराया वसूला।

टैक्सी चालकों की प्रमुख मांगें

  • पांच वर्ष से किराए में संशोधन नहीं हुआ है। 20-30% की मामूली बढ़ोतरी के बजाय संपूर्ण किराया प्रणाली में सुधार किया जाए।
  • निजी (प्राइवेट नंबर) कार, बाइक और ई-रिक्शा के व्यावसायिक (कमर्शियल) इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
  • एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी और अनुचित कमीशन दरों पर शासन द्वारा नियंत्रण स्थापित किया जाए।
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चालकों ने कहा- हमसे ज्यादा बेहतर स्थिति में आटो वाले, सरकार ध्यान दे

कंपनियों को तुरंत बेस फेयर बढ़ाना चाहिए। हम सभी साथी चालकों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने अधिकारों की इस लड़ाई में हड़ताल को पूर्ण सहयोग दें। जब तक न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।- प्रमोद कुमार, ओला चालक महंगाई के इस दौर में ओला-उबर कंपनियां किराया नहीं बढ़ा रही हैं। 10 लाख रुपये की गाड़ी खरीदकर हमें 60 से 70 रुपये की मामूली राइड मिलती है। इसमें से ईंधन, गाड़ी का मेंटेनेंस और बीमा निकालना नामुमकिन है। हमसे बेहतर स्थिति तो आटो चालकों की है।- राजेश विश्वकर्मा, टैक्सी चालक जब पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़े हैं तो टैक्सी का किराया भी बढ़ना चाहिए। पिछले पांच साल से दरें जस की तस हैं। सरकार से निवेदन है कि चालकों की दयनीय स्थिति पर ध्यान दे और किराया संशोधित करें।- नीरज राठौर, टैक्सी चालक

यात्री बोले- कोई बुकिंग नहीं ले रहा था, आम जनता पूरी तरह पिसती रही

मैं नरसिंहपुर जा रहा हूं। कोलार से रानी कमलापति स्टेशन से टैक्सी बुक की थी लेकिन बहुत दूर के बाद भी कोई बुकिंग नहीं ले रहा था, ऐसे मैं मुझे आटो बुक करे आना पड़ा। और जिसके लिए मुझे मोटी रकम भी देनी पड़ी।- प्रभात मुद्गल, यात्री हड़ताल की पूर्व सूचना न होने से आम जनता पूरी तरह पिस रही है। स्टेशन से बाहर निकलते ही आटो वाले मनमाना किराया मांग रहे हैं और मजबूरी में हमें अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं।- भूषण छापने, यात्री जरूरी काम से शहर में निकलना दूभर हो गया है। प्रशासन को एग्रीगेटर कंपनियों और टैक्सी चालकों के बीच का विवाद जल्द सुलझाना चाहिए, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।- राहुल कुमार, यात्री