
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ियां की गई हैं।
जीतू पटवारी ने रणनीति का खुलासा करते हुए दो दिवसीय बड़े आंदोलन का शेड्यूल जारी किया। इसके तहत 28 सितंबर को भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसमें प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे।
वहीं 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का घेराव करेंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पार्टी सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक इसका कड़ा विरोध करेगी।
पत्रकार वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र का भी जिक्र किया। पटवारी ने कहा कि प्रदेश के लाखों अभ्यर्थी इस अनिश्चितता के कारण परेशान हैं और नौकरियों में अपने हक से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पिछड़ों को उनका हक देने के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे लागू करने के बजाय उलझाने का काम किया। सरकार ने कानूनी दांव-पेच में करीब 200 करोड़ रुपये केवल इसलिए खर्च कर दिए ताकि युवाओं को इस आरक्षण का लाभ न मिल सके।
चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक पारा और चढ़ने के पूरे आसार हैं।