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MP में आईएएस अधिकारियों की कृषि भूमि की खरीद पर विवाद, भूमि खरीदी गई तब यहां से नहीं निकल रहा था वेस्टर्न बायपास, चार वर्ष बाद आधा किमी दूर से निकला ये बायपास

भोपाल की हुजूर तहसील के गुराड़ी घाट ग्राम स्थित दो हेक्टेयर से अधिक भूमि मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के अधिकारियों ने 2022 में लगभग साढ़े पांच करोड़...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 12 May 2026 02:26:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 02:38:56 PM (IST)
MP में आईएएस अधिकारियों की कृषि भूमि की खरीद पर विवाद, भूमि खरीदी गई तब यहां से नहीं निकल रहा था वेस्टर्न बायपास, चार वर्ष बाद आधा किमी दूर से निकला ये बायपास
प्रतीकात्मक फोटो है। इसे एआई से बनाया गया है।

HighLights

  1. अधिकारी बोले, बिना बात के विवाद खड़ा किया जा रहा है
  2. भोपाल की हुजूर तहसील के गुराड़ी घाट ग्राम के पास जमीन खरीदी
  3. जनवरी 2026 में नए लेआउट बायपास निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आवास बनाने की मंशा के साथ 2013 से लेकर 2016 बैच के कुछ आईएएस अधिकारियों ने भोपाल की हुजूर तहसील के गुराड़ी घाट ग्राम स्थित दो हेक्टेयर भूमि 50 लोगों के समूह में खरीदी। 2022 में जब यह भूमि खरीदी गई तब यहां से वेस्टर्न बायपास नहीं निकल रहा था, मगर बाद में एलाइनमेंट में परिवर्तन हुआ और यह भूमि बायपास से लगभग आधा-पौन किलोमीटर की परिधि में आ गई।

इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि एलाइनमेंट में परिवर्तन लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। कृषि उपयोग की भूमि का उपयोग भी परिवर्तन कर रहवासी कर दिया गया।

बिना बात के विवाद खड़ा किया जा रहा

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जब भूमि खरीदी गई थी, तब वहां कुछ भी नहीं था। यदि बाद में उच्च स्तर से बायपास का एलाइनमेंट परिवर्तन हुआ तो इससे उनका क्या लेना-देना है। बिना बात के विवाद खड़ा किया जा रहा है।


2013 बैच के आईएएस अधिकारी वर्तमान में नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह अपने अचल संपत्ति के विवरण में इस भूमि का उल्लेख किया है। उनके पास खसरा नंबर 124/1/1 में 2/50 भाग 0.079 हेक्टेयर भूमि है, जो संयुक्त रूप से 38 लोगों ने खरीदी। इसका मूल्य 22 लाख रुपये बताया गया।

इसी तरह 2014 बैच के अशोक नगर कलेक्टर साकेत मालवीय की भूमि खसरा नंबर 124/2/1/2 और 124/3 में 0.0809 हेक्टेयर भूमि में 2/50 भाग है, जो 24 लाख रुपये में खरीदा गया था। 2016 बैच के अधिकारी विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने खसरा नंबर 124/1/1/1/2 में कृषि भूमि 50 लोगों के समूह में खरीदी। इसकी कीमत 13 लाख रुपये बताई गई।

2013 बैच के ही आईएएस अधिकारी मयंक अग्रवाल ने गुराड़ी घाट में 5010 वर्गफीट भूमि 12 लाख 50 हजार रुपये में खरीदी। सभी भूमि 2022 में खरीदी गई। यह कोई पहले अधिकारी नहीं है, जिन्होंने भोपाल के आसपास भूमि खरीदी हो। प्रदेश संवर्ग के आधे से अधिक आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के नाम पर आवासीय और कृषि योग्य भूमियां हैं। इस मामले के चर्चित होने के पीछे मूल वजह भोपाल वेस्टर्न बायपास का गणित बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला

भोपाल शहर में लगातार यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने इसे कम करने के लिए 11 मील के पास से 52 किलोमीटर का बायपास निकाला जो गांधीनगर तक जाता है। वहीं एक और बायपास की जरूरत महसूस होने पर यातायात का दबाव कम करने के लिए हाईब्रिड एन्यूटी माडल पर 40.90 किलोमीटर लंबे चार लेन वेस्टर्न बायपास बनाने का निर्णय कर चार सितंबर 2023 को 2981.65 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई।

2024 में रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया गया

मेसर्स पीएनसी इन्फ्रा लिमिटेड के साथ सात मार्च 2024 को अनुबंध भी हो गया परंतु 80 प्रतिशत भूमि ठेकेदार को नहीं दी जा सकी। उधर, दो दिसंबर 2024 को रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया, जिससे प्रस्तावित मार्ग का कुछ भाग बफर जोन में आने, प्राचीन शिव मंदिर (समसगढ़) तथा बड़े तालाब के केचमेंट क्षेत्र में पुलों के समुचित प्रविधान पर्यावरण विभाग अधिसूचना के अनुसार नहीं करने पर स्वीकृति नहीं मिली।

इसलिए एलाइनमेंट में परिवर्तन किया गया

यह मंडीदीप के पास इकायाकलां से फंदा तक बनाने की थी। इसमें वन क्षेत्र 6.01 किलोमीटर था। सरकार के सामने एक विकल्प था कि बायपास का प्रोजेक्ट ही निरस्त कर दिया जाए या फिर नया मार्ग तलाशा जाए। सरकार ने दूसरे विकल्प पर काम किया क्योंकि शहर में यातायात का दबाव कम करना आवश्यक था इसलिए एलाइनमेंट में परिवर्तन किया गया।

यह अब मंडीदीप रतनपुर मार्ग से प्रारंभ होकर कोलार-रातीबड़, फंदाकलां होते हुए भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक बनेगा, जिसकी लंबाई 31.61 किलोमीटर लंबा रहेगी यानी 21 किलाेमीटर घट गई। लागत 3225.51 करोड़ रुपये आएगी।

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घर बनाने के लिए खरीदी, शासन को दी सूचना

भूमि खरीदार नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह ने बताया कि भविष्य में घर बनाने के लिए कृषि भूमि खरीदी थी। भूमि खरीदने के लिए नियमानुसार शासन से अनुमति ली गई थी। अचल संपत्ति के विवरण में इसकी घोषणा भी की गई है। खरीदार में अधिकारियों के साथ अन्य पेशे से जुड़े लोग भी हैं।

लगभग पांच एकड़ का भूखंड है, जिसका पंजीयन अलग-अलग लोगों के नाम है। जब हमने भूमि खरीदी थी, तब वहां कुछ था ही नहीं। कृषि भूमि का आवासीय उपयोग परिवर्तन का सामान्य नियम है कि निर्धारित शुल्क देकर कराया गया। हमें भी अभी पता चला कि बायपास निकल रहा है।