
Corona Delta Plus Variant: भोपाल (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस (एवाय1) वैरिएंट को दुनियाभर के चिकित्सक और वैज्ञानिक खतरनाक बता रहे हैं, लेकिन भोपाल में बुधवार को 65 साल की जिस महिला में यह मिला है, उन्होंने घर में ही रहकर कोरोना को मात दे दी। महिला 21 मई को संक्रमित हुई थी। करीब पांच दिन तक 100 डिग्री तक बुखार आया था। इसके बाद सूंघने की क्षमता चली गई। जांच में लिवर में भी कुछ दिक्कत मिली थी। होम आइसोलेशन में ही चार डॉक्टरों की टीम ने महिला का इलाज किया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
उनके बेटे ने कहा कि फेफड़े में बहुत कम संक्रमण पहुंुचा था। हालांकि, अन्य वैरिएंट से संक्रमित मरीजों की भांति डी-डाइमर और आइएल-6 बढ़े हुए थ्ो। इससे साफ है डेल्टा प्लस वैरिएंट के लक्षण भी डेल्टा वैरिएंट की तरह ही हैं। बुधवार को उनकी कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई है।
बेटे ने बताया कि उन्हें कोविशील्ड के दोनों डोज भी लग चुके थे। कोरोना पॉजिटिव आने के महीने भर पहले उन्हें दूसरा डोज लगा था। भोपाल के छाती व श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र दवे ने कहा कि हो सकता है टीका लगे होने की वजह से वायरस का असर कम रहा हो। बेटे ने बताया कि मार्च के बाद से वह लोग घर से बाहर ही नहीं निकले, ऐसे में यह समझ नहीं आ रहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट का संक्रमण कैसे हुआ। हां, चमगादड़ जरूर घर में घुस जाते हैं।
संपर्क में आए लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव
महिला के संपर्क में आए 18 लोगों की जांच रिपोर्ट गुरुवार को निगेटिव आ गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि महिला का बेटा भी मार्च में कोरोना से संक्रमित हुआ था। मां-बेटे दोनों के संक्रमित होने में करीब दो महीने का फर्क है, इसलिए बेटे के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग कराने का कोई मतलब नहीं है।
और हो सकते हैं मामले
इस वैरिएंट के देश में इसके पहले तक सिर्फ छह मामले ही जीनोम सिक्वेंसिंग में मिले थे। हालांकि, वैरिएंट का पता लगाने के लिए कुल पॉजिटिव सैंपल में से एक या दो फीसद ही भेजे जाते हैं। ऐसे में हकीकत में इस वैरिएंट से प्रभावित लोगों की संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।
इनका कहना है
जो सैंपल भोपाल से जांच के लिए गए थे, इनमें एक सैंपल में नया वैरिएंट मिला है। इसकी आगे भी हम जांच करा रहे हैं।
- विश्वास सारंग, चिकित्सा शिक्षा मंत्री और भोपाल के कोविड प्रभारी