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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कांग्रेस विधायक अकील के पशु अंगों संबंधी संकल्प पर उलझी सरकार

विधानसभा में कांग्रेस विधायक आरिफ अकील ने पशु अंगों संंबंधी मुद्दे पर सरकार को उलझन में डाल दिया।

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Publish Date: Fri, 11 Jul 2014 05:25:57 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Jul 2014 06:16:41 PM (IST)
कांग्रेस विधायक अकील के पशु अंगों संबंधी संकल्प पर उलझी सरकार

राजीव सोनी, भोपाल। विधानसभा में कांग्रेस विधायक आरिफ अकील ने एक अशासकीय संकल्प के माध्यम से गाय के मरने के बाद उसे जलाने या दफनाने और उसके अंगों की बिक्री पर रोक लगाने के मुद्दे पर सरकार को उलझन में डाल दिया। मंत्रियों ने कहा कि वे गाय पर संवेदनशील हैं लेकिन वे संकल्प पारित करने से बचते रहे। इस कारण सदन में मत विभाजन की स्थिति बनी और संकल्प बहुमत के आधार पर गिर गया।

विधायक आरिफ अकील ने गाय के मरने के बाद उसे जलाने या दफनाए जाने, मृत शरीर की हड्डियों, चर्बी व चमड़ी की बिक्री पर रोक के लिए एक अशासकीय संकल्प पेश किया था। इस संकल्प को लेकर सदन में बीजेपी के विभागीय मंत्री कुसुम मेहदेले सहित करीब आधा दर्जन मंत्रियों वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता, रामपाल सिंह ने बचाव किया। इन लोगों ने तर्क दिया कि सरकार गऊमाता को लेकर लापरवाह नहीं है। गऊमाता की उपेक्षा नहीं कर सकती।


पशुपालन मंत्री कुसुम मेहदेले ने तर्कों के बीच यह तक कह दिया कि पारसी समुदाय के लोगों में यह परंपरा है कि मृत शरीर को कुएं की मुंडेर पर रख दिया जाता है और चील-कौए खा जाते हैं। उनकी बात पूरी होती इसके पहले कांग्रेस विधायक मुकेश नायक ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह बातें आध्यत्म और लोक मान्यताओं के विपरीत है। ऐसे कुतर्क गऊमाता को लेकर नहीं दिए जाने चाहिए।

अशासकीय संकल्प पर सदन में पहले ध्वनि मत का सहारा लिया गया लेकिन आसंदी को इससे बहुमत का अंदाज नहीं हुआ। तब मत विभाजन की स्थिति बनी और इसके समर्थन में 30 व विरोध में 55 मत डाले गए जिससे संकल्प गिर गया।