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एमपी में अफसरों की मनमानी पर कसा शिकंजा, फाइल दबाने पर सैलरी से कटेगा जुर्माना

सरकार ने 'मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' के माध्यम से एक नई डिजिटल प्रणाली लागू की है, जो तय समय-सीमा में काम न करने वाले अधिकारियों की ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 25 Aug 2026 05:18:47 PM (IST)Updated Date: Tue, 25 Aug 2026 05:18:47 PM (IST)
एमपी में अफसरों की मनमानी पर कसा शिकंजा, फाइल दबाने पर सैलरी से कटेगा जुर्माना
प्रशासनिक लेट-लतीफी पर होगा कड़ा एक्शन।

HighLights

  1. प्रशासनिक लेट-लतीफी पर होगा कड़ा एक्शन
  2. मुख्य सचिव-कलेक्टर करेंगे सीधी निगरानी
  3. लागू हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी उद्योग, व्यापार या निवेश से जुड़ी फाइलों को अटका कर नहीं रख सकेगा। राज्य सरकार ने 'मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' के माध्यम से एक नई डिजिटल प्रणाली लागू की है, जो तय समय-सीमा में काम न करने वाले अधिकारियों की शक्तियां स्वतः छीन लेगी।

प्रशासनिक लेटलतीफी को खत्म करने के लिए लागू इस व्यवस्था में समय पर मंजूरी न देने वाले अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और वेतन से पेनल्टी काटने का प्रावधान किया गया है।

सिंगल विंडो सिस्टम से होंगी मंजूरियां

पुरानी व्यवस्था में निवेशकों और कारोबारियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या विभिन्न स्वीकृतियों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार फाइलें महीनों तक एक ही टेबल पर लंबित रहती थीं।

  • एकल खिड़की प्रणाली: नए कानून के तहत सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल 'सिंगल विंडो सिस्टम' पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • बहानों पर रोक: अब किसी भी विभाग के पास आवेदनों को लंबित रखने का कोई तकनीकी या विधिक आधार नहीं रहेगा।

क्या है 'ऑटो एस्कलेशन' तकनीक?

नए कानून (अध्याय-5, धारा 13 (1)) का मुख्य आधार 'स्वतः वृद्धि' यानी 'Auto-Escalation' तकनीक है।

  • स्वतः ट्रांसफर: यदि किसी सक्षम अधिकारी को आवेदन पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना है और वह तय समय में प्रक्रिया पूरी नहीं करता, तो 16वें दिन वह फाइल उसके डिजिटल डेस्क से अपने आप हट जाएगी।
  • उच्च अधिकारी को हस्तांतरण: फाइल सीधे उसके वरिष्ठ अधिकारी (Higher Authority) के पास ट्रांसफर हो जाएगी। इसके साथ ही फाइल रोकने वाले अफसर का निर्णय लेने का अधिकार खत्म हो जाएगा और उसकी यह ढिलाई रिकॉर्ड में दर्ज कर ली जाएगी।

बार-बार आपत्ति जताने पर रोक और 7 दिन का नियम

प्रशासनिक अड़ंगों को समाप्त करने के लिए धारा 12 के तहत 'सिर्फ एक बार सवाल' पूछने की व्यवस्था लागू की गई है।

  • एक ही बार में मांगनी होगी जानकारी: अब कोई भी अधिकारी आवेदन प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर केवल एक बार ही अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण मांग सकता है।
  • बार-बार की आपत्तियों पर रोक: एक बार मांगी गई जानकारी जमा होने के बाद अधिकारी बार-बार नई आपत्तियां या सवाल नहीं उठा सकेगा और उसे निर्धारित अवधि में ही फैसला लेना होगा।

लापरवाही पर जेब से कटेगा जुर्माना

कानून के अध्याय-8 की धारा 20 में समय-सीमा में कार्य न करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को दंडित करने का कड़ा नियम है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्रवाई: तय समय में स्वीकृति न देने वाले अधिकारी पर 'मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010' के तहत प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी लगाई जाएगी।

यह जुर्माना संबंधित विभाग के खाते से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन (सैलरी) से वसूला जाएगा।

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केंद्रीकृत नियंत्रण और नोडल एजेंसी

अधिनियम की धारा 7 के अनुसार, राज्य के सभी संबंधित विभागों (जैसे राजस्व, पर्यावरण, ऊर्जा, श्रम आदि) को आगामी 6 महीनों के भीतर उद्योग और व्यापार संबंधी अपनी स्वीकृतियों के अधिकार 'राज्य नोडल एजेंसी' (MPIDC) को हस्तांतरित करने होंगे।

इस व्यवस्था से सभी विभागों की कार्यप्रणाली एक मंच पर आ जाएगी। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर सीधे तौर पर आवेदनों के निस्तारण और अधिकारियों की कार्यशैली पर निगरानी रखेंगे।