
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: कश्मीर में पहलगाम का आतंकी हमला देश के लिए एक राष्ट्रीय त्रासदी था, लेकिन अब उसी हमले का नाम लेकर साइबर ठगों ने भोपाल में भय और लूट का नया अध्याय खोल दिया है। आतंकवाद के नाम पर डर फैलाकर ठगों ने अब तक शहर में 20 से अधिक लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उनकी जिंदगी को दहशत में डाल दिया है।
इस साइबर आतंक के सबसे बड़े शिकार वरिष्ठ नागरिक बन रहे हैं। ठग अनजान नंबरों से कॉल कर खुद को दिल्ली या मुंबई क्राइम ब्रांच, ईडी, एनआईए या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। पीड़ितों को बताया जाता है कि उनका नाम पहलगाम हमले की जांच में सामने आया है और वे आतंकी फंडिंग से जुड़े हैं। गिरफ्तारी और जेल की धमकी देकर उन्हें वीडियो कॉल पर रखा जाता है और जांच के नाम पर बैंक खातों की जानकारी लेकर रकम ट्रांसफर कराई जाती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस ठगी का शिकार सिर्फ आम बुजुर्ग नहीं, बल्कि वरिष्ठ वकील, सेवानिवृत्त शिक्षक और कई पूर्व सरकारी अधिकारी भी हुए हैं।
जहांगारीबाद क्षेत्र में एक वरिष्ठ वकील पर लगाए गए ऐसे ही फर्जी आरोपों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया और अंततः उन्होंने खुदकुशी का कदम तक उठा लिया। यह घटना साइबर ठगी के इस नए और खतरनाक चेहरे को उजागर करती है। पहलगाम हमला जहां देश की सुरक्षा के लिए चुनौती था, वहीं उसका नाम लेकर की जा रही यह साइबर ठगी बुजुर्गों के लिए एक दूसरा, खामोश आतंक बन चुकी है।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के बरखेड़ी इलाके में रहने वाले जिला अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता 68 वर्षीय शिवकुमार शर्मा को साइबर ठगों से एक फोन कॉल आया था। ठगों ने उन पर पहलगाम हमले में आतंकवादियों को फंडिंग का आरोप लगाया था। इसी से घबराकर उन्होंने फांसी लगा ली थी। जहांगीराबाद पुलिस को मृतक के कमरे से सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया था।
दिसंबर 2025 में कोहेफिजा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता 75 वर्षीय शम्स उल हसन को भी ऐसे ही अज्ञात नंबर से वाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुणे एटीएस का सब इंस्पेक्टर अभय प्रताप सिंह बताया और कहा कि शम्स उल हसन का नाम पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ गया है। इसकी जानकारी मिलने पर कोहेफिजा पुलिस के अधिकारियों ने जाकर उनका रेस्क्यू किया था।
साकेत नगर में रहने वाले रिटायर्ड भेल अधिकारी और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने ढाई महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 48 लाख रुपये की ठगी की थी। साइबर ठगों ने उन्हें केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी बनकर फोन कर पहलगाम आतंकी हमले में फंडिंग का आरोप लगाया था। उन्होंने जांच के नाम सभी बैंकों की जानकारी मांगी और फिर जमा राशि को ट्रांसफर करवाया। इतना ही नहीं रिश्तेदारों से 20 लाख रुपये उधार लेने का दबाव भी बनाया था।
साकेत नगर निवासी 75 वर्षीय राजेंद्र सिंह भी भेल से रिटायर्ड हैं। 28 नवंबर को उन्हें अज्ञात व्यक्ति ने वाट्सएप वीडियो कॉल किया और खुद को जहांगीराबाद पुलिस का अधिकारी बताया। उसने राजेंद्र के आधार कार्ड से एक फर्जी बैंक खाता खुलने और उस खाते से आतंकी हमले की फंडिंग का आरोप लगाया। ठगों ने पति-पत्नी के विरूद्ध वारंट जारी होने तक का दावा किया था और इस तरह 52 लाख रुपये ऐंठ लिए थे।
पिपलानी क्षेत्र स्थित कल्पना नगर में 63 वर्षीय आशा जैन अकेली रहती हैं। 29 दिसंबर को उनके फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था। उसने स्वंय को केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताया। ठगों ने आरोप लगाया कि पहलगाम हमले के आतंकवादियों के खाते से आपके बैंक खाते में रुपये भेजे गए हैं। इसकी जांच की जाएगी और बैंक खाते में जमा ढाई लाख रुपये हमें भेजें। वृद्ध महिला ने राशि भेजी और फिर जब अपनी बेटी को पूरी बात बताई, जिससे ठगी का खुलासा हुआ। एसआइ उमेश मिश्रा ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है।
साइबर ठग आतंकवादियों से संबंध बताकर लोगों में भय पैदा करते हैं, इससे डरकर लोग उनके झांसे में आ जाते हैं। इसी तरह की कई शिकायतें लगातार प्राप्त हुई हैं। लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता है, यदि कोई भी एजेंसी या पुलिस इस प्रकार के आरोप लगाती है तो भौतिक रूप से उपस्थित होती है या फिर नजदीकी थाने बुलाकर कार्रवाई की जाती है।
-शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच