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भोपाल के भूजल में मिला जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया, NGT ने सरकार को लगाई फटकार, मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

राजधानी के भूजल में जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी नगर निगम द्वारा अकुशल कर्मचारियों से पानी की जांच कराई जा रही है, जिस...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 14 Apr 2026 07:31:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Apr 2026 07:30:59 PM (IST)
भोपाल के भूजल में मिला जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया, NGT ने सरकार को लगाई फटकार, मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
पानी में बैक्टीरिया मिलने पर एनजीटी सख्त। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. भोपाल-इंदौर में दूषित पानी का कहर
  2. 6 साल में 5 लाख से ज्यादा बीमार
  3. सरकार से मांगी एक्सपर्ट्स की सूची

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के भूजल में जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी नगर निगम द्वारा अकुशल कर्मचारियों से पानी की जांच कराई जा रही है, जिस पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल और इंदौर में पेयजल सुरक्षा और निगरानी में लंबे समय से हो रही विफलताओं पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से विशेषज्ञों की सूची मांगी है। एनजीटी में दायर याचिका के अनुसार, भोपाल नगर निगम पेयजल की जांच जैसे गंभीर कार्य के लिए विशेषज्ञों के बजाय अकुशल और अप्रशिक्षित अस्थाई कर्मचारियों का उपयोग कर रहा है।

विशेषज्ञों की जगह अकुशल कर्मचारियों से जांच पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता का तर्क है कि रसायनों और पानी की गुणवत्ता की जांच केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा ही की जानी चाहिए, क्योंकि गलत रिपोर्ट मासूम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल सकती है। दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतें होने के बाद भोपाल में भी नगर निगम द्वारा पेयजल की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में 5.45 लाख से अधिक लोग दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का शिकार हुए हैं। यह आंकड़ा सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।


पानी की किल्लत और सरकारी तंत्र की विफलता

भोपाल में हजारों लोग पिछले 15 दिनों से पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरी में टैंकरों पर निर्भर हैं। आरोप है कि नगर निगम समस्या सुलझाने के बजाय कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति बंद कर देता है, जिससे जनता का सरकारी तंत्र पर से विश्वास उठ रहा है। यही स्थिति इंदौर में भी है, जहां पाइपलाइन लीकेज ठीक न होने के कारण 15 कालोनियों के 30 हजार से अधिक लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं।

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'एक्शन टेकन रिपोर्ट' पेश करे प्रशासन

अधिकरण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को 15 जनवरी 2026 के आदेश का पालन करने और तत्काल ''एक्शन टेकन रिपोर्ट'' पेश करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता की मांग है कि पानी की जांच का जिम्मा आईआईटी जैसे संस्थानों को दिया जाए, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश में उपलब्ध विशेषज्ञ संस्थाओं के नाम तलब किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।