
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल सहित जिन शहरों में मास्टर प्लान नहीं आए हैं, वहां विभागीय स्तर पर संज्ञान लेकर कार्रवाई होगी। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग को निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी मास्टर प्लान का विषय लाया जाएगा और कोर्ट के निर्देश के अनुसार हम आगे की कार्रवाई करेंगे।
नईदुनिया ने एक दिन पहले ही बताया था कि सरकार भोपाल की आवश्यकता को देखते हुए मास्टर प्लान लाए जाने की तैयारियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगी। मुख्यमंत्री ने रविवार को भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि मास्टर प्लान एक विषय संवेदनशील है।
मैं कांग्रेस मित्रों से भी कहूंगा कि इस पर राजनीति मत करो। आपके (कांग्रेस) के समय भी सरकार थी, लेकिन तब इस दिशा में कुछ नहीं किया। अब होने वाली घटना का झूठा श्रेय लेते हो, जनता सब जानती है।
भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस नेता लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के 31 घंटे के धरने के समापन पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि यदि सरकार तीन माह में मास्टर प्लान जारी नहीं करती तो इंदौर से भोपाल तक 50 हजार कांग्रेस पदयात्रा करेंगे।
दरअसल, मास्टर प्लान को लेकर सभी संबंधित पक्षों से चर्चा हो चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को देखते हुए सरकार जल्दबाजी नहीं करना चाहती। अब न्यायालय के निर्देश पर ही आगे बढ़ा जाएगा, क्योंकि पिछली बार सीलिंग के मुद्दे पर उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी, जिसे न्यायालय ने अवमानना बताते हुए आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भोपाल सहित अन्य शहरों के रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सीलिंग की कार्रवाई की गई हैं। व्यवसायी सड़क पर उतर चुके हैं, ठोस कार्रवाई न होने को लेकर रहवासी भी प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं सरकार बीच का रास्ता निकालना चाहती है, ताकि दोनों पक्ष संतुष्ट हों और शहर का सुव्यवस्थित विकास हो सके।