डिप्टी CM जगदीश देवड़ा के पूर्व OSD दीपम रायचुरा निलंबित! 2.75 करोड़ की फर्जी FDR से शराब दुकान दिलाने का आरोप
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी रहे भोपाल के तत्कालीन प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा को निलंबित कर दिया गया है।
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 11:02:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 11:02:03 PM (IST)
डिप्टी CM जगदीश देवड़ा के पूर्व OSD दीपम रायचुराHighLights
- फर्जी एफडीआर मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचुरा सस्पेंड
- 2.75 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी से दिलाई थी दो शराब दुकानें
- जांच में मिली 5 बड़ी अनियमितताएं, निलंबन अवधि में ग्वालियर मुख्यालय
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी रहे भोपाल के तत्कालीन प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा को निलंबित कर दिया गया है। जांच में पौने तीन करोड़ रुपये के फर्जी एफडीआर से भोपाल में दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत नामक व्यक्ति को दिलाने का आरोप प्रथम दृष्ट्या साबित होने के बाद आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार को दीपम के निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं।
930 करोड़ रुपये की अलग-अलग ठगी के 15 से अधिक मामलों में दिल्ली में गिरफ्तार मोहित गोगिया ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में आरोप लगाया था कि रायचुरा ने फर्जी एफडीआर से भोपाल के न्यू मार्केट में शराब की दो दुकानें ठेके पर लेने में सहयोग किया था। बयान में यह भी आरोप था कि रायचुरा को एक करोड़ रुपये की रिश्वत भी शराब दुकान के लिए दी थी।
मामला वर्ष 2024-25 का है। मीडिया में खबरें आने के बाद देवड़ा ने रायचुरा को अपने ओएसडी के दायित्व से मुक्त कर दिया था। रायचुरा के निलंबन की अवधि के दौरान मुख्यालय कार्यालय आबकारी आयुक्त ग्वालियर निर्धारित किया गया है। बता दें कि देवड़ा के आदेश पर आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने उसी दिन (नौ अक्टूबर) को दो सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया था। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में दीपम रायचुरा को प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए जाने पर निलंबन के आदेश जारी किए।
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जांच में सामने आई ये पांच बड़ी अनियमितताएं
- फर्जी ई-एफडीआर स्वीकृति: दीपम रायचुरा ने एयू स्माल फाइनेंस बैंक की 2,75,53,535 की फर्जी ई-एफडीआर स्वीकार कर ली। बैंक ने लिखित में दिया कि उन्होंने ऐसी कोई एफडीआर जारी ही नहीं की थी। यही नहीं, फाइल में जांच अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और झूठी सत्यापन रिपोर्ट भी लगाई गई थी।
अमान्य बैंक की गारंटी: आबकारी नियमों के मुताबिक केवल सार्वजनिक, निजी या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की ही प्रतिभूति (सिक्योरिटी) मान्य होती है। रायचुरा ने नियमों के खिलाफ जाकर लघु वित्त बैंक (स्माल फाइनेंस बैंक) की अमान्य गारंटी स्वीकार की।
विलंब पर कोई कार्रवाई नहीं: लाइसेंसधारी को 50 प्रतिशत (1,37,76,768 रुपये) की राशि प्रत्याभूत ड्यूटी 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन उसने इसे 22 दिन की देरी से 12 मई को जमा किया। अधिकारी ने इस पर कोई नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।
अनाधिकृत व्यक्ति को पार्टनर मानना: मेसर्स मां माइंस फर्म के ट्रांसफर मामले में बिना आधिकारिक पार्टनरशिप डीड (डाक्यूमेंट्स) चेक किए ही विजय सिंह नाम के व्यक्ति को पार्टनर मान लिया गया, जबकि वे आबकारी पोर्टल पर पार्टनर थे ही नहीं।
व्यक्तिगत खाते से गारंटी स्वीकारना: फर्म के बजाय एक बाहरी गैर-भागीदार व्यक्ति (विजय सिंह) के पर्सनल बैंक अकाउंट से 76 लाख की बैंक गारंटी और पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार किए गए। इससे सरकारी राजस्व की सुरक्षा को जानबूझकर बड़े जोखिम में डाला गया।