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मनरेगा का भुगतान अटकने से गांवों में थमे विकास के पहिये, केंद्र से 1,500 करोड़ का फंड लंबित, ठेकेदारों ने रोकी सप्लाई

मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कराए गए कार्यों का भुगतान अटकने से ग्रामीण क्षेत्रों में निर्म...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 08:30:40 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 08:30:40 PM (IST)
मनरेगा का भुगतान अटकने से गांवों में थमे विकास के पहिये, केंद्र से 1,500 करोड़ का फंड लंबित, ठेकेदारों ने रोकी सप्लाई
मनरेगा का भुगतान अटकने से गांवों में थमे विकास के पहिये (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. मनरेगा के 1500 करोड़ रुपये अटके
  2. कुछ पंचायतों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति रुकी
  3. 6 लाख से अधिक मनरेगा कार्य अधूरे

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कराए गए कार्यों का भुगतान अटकने से ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे हैं। केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाली करीब 1500 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। दो माह पहले तक यह बकाया लगभग 600 करोड़ रुपये था।

भुगतान नहीं होने से कुछ ग्राम पंचायतों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों ने काम रोक दिया है।इससे पंचायतों के सामने अधूरे कार्यों को समय पर पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच प्रदेश में एक जुलाई से मनरेगा की जगह विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन के लिए गारंटी (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी योजना शुरू हो चुकी है।


नई व्यवस्था में केंद्र सरकार का अंश 60 प्रतिशत और राज्य सरकार का हिस्सा 40 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि मनरेगा में केंद्र से 90 प्रतिशत राशि मिलती थी। ऐसे में राज्य सरकार की कोशिश है कि मनरेगा के अंतर्गत पहले से चल रहे कार्यों को जल्द पूरा कर लिया जाए।

देरी होने पर नई योजना के अंतर्गत कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी आने से राज्य पर वित्तीय भार बढ़ सकता है। वीबी-जीरामजी योजना के अधिकारियों ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत अभी भी छह लाख से अधिक काम प्रगति पर हैं। इसमें लगभग आधे शासकीय आवास योजनाओं के हैं। केंद्र से मिलने वाली राशि और राज्यांश मिलाकर मजदूरों का भुगतान तो हो जाता है, पर सामग्री का नहीं हो पाता।

यह भी पढ़ें- MP में मनरेगा का महाघोटाला: सरकारी एप का 'क्लोन' बनाकर दर्ज की फर्जी हाजिरी; ₹200 करोड़ के गबन की आशंका, CBI जांच की मांग

यह भी सही है कि मनरेगा के अंतर्गत चल रहे काम जैसे-जैसे पूरा होते जाएंगे वीबी-जीरामजी के अंतर्गत काम बढ़ाए जाएंगे जिससे श्रमिकों को कार्य मिलता रहे। वीबी-जीरामजी में अभी लगभग 40 हजार कार्यों की आइडी तैयार हो चुकी हैं। यानी इन्हें स्वीकृति मिल गई है।

इस संबंध में वीबी-जीरामजी के सीईओ मयंक अग्रवाल का कहना है कि बकाया राशि के लिए केंद्र से बातचीत चल रही है। जल्द ही राशि मिलने की आशा है। कार्यों पर कोई असर नहीं है।